कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा चुनावी रैली में घृणास्पद बयान को लेकर आरएसएस असम प्रांत इकाइयों ने दिसपुर एवं सिलचर पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई
8 अप्रैल को इस दिवस के रूप में मनाने के पीछे प्रमुख कारण यही है कि बंजारा समाज इन संतों को अपना आराध्य और मार्गदर्शक मानता है। इस दिन उनके द्वारा समाज सुधार के लिए किए गए कार्यों को स्मरण किया जाता है। कई स्थानों पर इसे उनके जन्मोत्सव के रूप में या उनके सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष उत्सव की तरह भी मनाया जाता है, जिससे उनकी शिक्षाएँ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँच सकें।
गुना में धर्मांतरण का खेल: ईस्टर के नाम पर भोज और “चंगाई” का दावा, जनजातीय समाज की आस्था पर सवाल
भारत की स्वाधीनता को 77 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन देश का एक बड़ा हिस्सा आज भी अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है, ये हैं डिनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय, जिन्हें हम DNT/NT/SNT के नाम से जानते हैं। अनुमान लगाया जाता है कि इनकी जनसंख्या 8 से 11 करोड़ के बीच है, पर विडंबना यह है कि भारत की किसी भी राष्ट्रीय जनगणना ने इन्हें कभी अलग श्रेणी में नहीं गिना। इसी कारण 2027 की प्रस्तावित जनगणना को लेकर इन समुदायों में नई आशा जन्मी है, क्योंकि पहली बार उनकी पहचान साफ़-साफ़ दर्ज होने की संभावना बन रही ह
दादा माखनलाल का व्यक्तित्व एवं कृतित्व बहुआयामी है। वे कभी क्रान्तिकारी राजनेता, कभी पत्रकार, कभी साहित्यकार तो कभी भारतीय परम्परा के महान संवाहक के रूप में हमारे समक्ष दृढ़ अडिग स्तंभ के रूप में उपस्थित होते हैं।
श्री पराग जी अभ्यंकर ने “पंच परिवर्तन” के पाँच सूत्र कुटुंब प्रबंधन, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण और नागरिक कर्तव्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये पांच परिवर्तन केवल विचार नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के सशक्त आधार हैं।
यह वर्ष ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ का है। वंदे मातरम् का सामूहिक गान पूरे देश में एक ऊर्जा और एकता का भाव उत्पन्न करता है, जो राष्ट्र निर्माण की भावना को और सुदृढ़ करता है।
समाज परिवर्तन केवल विचार या वक्तव्यों से नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने से संभव है। पंच परिवर्तन - सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य को यदि जीवन शैली का हिस्सा बनाया जाए, तो समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य क्षेत्र के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर ने व्यक्त किए।
एक समय ऐसा था जब हिंदू कहलाने में भी लोगों को हीन भावना होती थी, लेकिन संघ के सतत प्रयासों से आज समाज गर्व के साथ अपनी पहचान स्वीकार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले हिंदू समाज केवल अपने और अपने परिवार तक सीमित सोच रखता था, लेकिन अब व्यापक सामाजिक जागृति आई है।
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में “विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व : भारतीय वैज्ञानिकों का संघर्ष” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से ज्ञान विज्ञान भवन, विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआl जिसमें शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संघ का कार्य समाज को समरस, समर्थ एवं सशक्त बनाने के लिए चल रहा है – दत्तात्रेय होसबाले जी
रामजी का युद्ध सत्ता के लिये नहीं, सत्य की स्थापना के लिये था
विनोद जोहरी- संक्रान्ति का अर्थ है, ‘सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण (जाना)’. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है. पूरे वर्ष में कुल 12 संक्रान्तियां होती हैं. लेकिन इनमें से चार संक्रांति मे
गीता जयंती प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। बताया जाता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण के मुख से गीता के उपदेश निकले थे। पूरे विश्व भर में मात्र श्रीमद भगवत गीता ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष
बालासोर: 3 जून ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण रेल दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सैकड़ों स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। संघ के स्वयंसवकों ने करीब 500 यूनिट रक्तदान किया है। बालेश्वर जिले के बाहनगा रेलवे स्टेशन के निक
संघ का सेवा कार्य- दस दिवसीय दन्त चिकित्सा शिविर का आयोजन सैकड़ों की संख्या में नागरिकों ने उठाया लाभ नागरिकों ने संघ के कार्य को सराहा भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेवा विभाग के द्वारा
सेवागाथा – वैदिक परंपराओं का पुनर्जागरण सुरभि शोध संस्थान (वाराणसी)
सेवागाथा - हर मुश्किल के साथी।
राष्ट्र सेविका समिति ने बनाई कोविड संजीवनी हेल्प लाइन
बालाघाट -अयोध्या में श्री राम लला का मंदिर 500 वर्षों के बाद पुनः बनने को अब तैयार है. सैकड़ों वर्षो के प्रतीक्षा के बाद एक भव्य राम मंदिर के लिए पूरा देश उत्सुक है. देश का हर समाज हर वर्ग हर पंथ इसमें अपना सहयोग देना चाहता है. इसी वजह से श्री राम मंदिर
नेताजी की 125वीं जयंती एवं पराक्रम दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने आयोजित किया रक्तदान शिविर और विशेष व्याख्यान भोपाल। कोरोना काल
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए देशभर में निधि समर्पण अभियान प्रारंभ हो गया है. मंदिर की नींव को लेकर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं. जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होने की आशा है. निधि समर्पण अभियान और श्रीराम मंदिर निर्माण को ले
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए 15 जनवरी से 14 फरवरी 2021 तक मध्यप्रदेश में जन-जन को जोड़कर निधि समर्पण के अंतर्गत राशि संग्रह की जाएगी, इसके लिए शनिवार राजधानी भोपाल में विस्तृत योजना बनी है। इसमें आम लोग कूपन से भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण में अपनी श्रद्धा निधि समर्पण राशि दे सकेंगे। जिसके लिए 10 रुपये, 100 रुपये और 1000 रुपये के कूपन तैयार किए गए हैं। इसके अलावा जिन्हें इससे अधिक राशि देनी है वे डीडी, चेक या रसीद-बुक से अपने पेन नंबर के साथ दे सकेंगे।