कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा चुनावी रैली में घृणास्पद बयान को लेकर आरएसएस असम प्रांत इकाइयों ने दिसपुर एवं सिलचर पुलिस थानों में शिकायत दर्ज कराई
गुना में धर्मांतरण का खेल: ईस्टर के नाम पर भोज और “चंगाई” का दावा, जनजातीय समाज की आस्था पर सवाल
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में “विज्ञान में राष्ट्रीय स्वत्व : भारतीय वैज्ञानिकों का संघर्ष” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रज्ञा प्रवाह के सहयोग से ज्ञान विज्ञान भवन, विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआl जिसमें शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संघ का कार्य समाज को समरस, समर्थ एवं सशक्त बनाने के लिए चल रहा है – दत्तात्रेय होसबाले जी
बीसवीं सदी में पश्चिमी समाज में एक वैचारिक परिवर्तन धीरे-धीरे विकसित हुआ, जिसने परिवार, विवाह, लिंग पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों जैसी पारंपरिक संरचनाओं को चुनौती देना शुरू किया। यह परिवर्तन अचानक नहीं हुआ। इसकी बौद्धिक नींव 1920 और 1930 के दशक में ही रखी जा चुकी थी, लेकिन इसका सामाजिक प्रभाव 1960 और 1970 के दशक में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा।
पत्रकारिता का मूल धर्म सत्ता से सवाल पूछना है, सरकार को किसी समस्या का समाधान खोज के देना है, किंतु जब यही सवाल एकतरफा दृष्टिकोण और चयनात्मक तथ्यों के साथ प्रस्तुत किए जाते हैं तब वे विमर्श नहीं बल्कि नैरेटिव बन जाते हैं। हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा राणा अय्यूब के पुराने ट्वीट्स पर की गई कड़ी टिप्पणियों ने उनके सोशल मीडिया व्यवहार को कटघरे में खड़ा किया है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि वे अब तक एक खास विचार जोकि भारत की छवि को धूमिल करता है के लिए लिखती रही हैं।
भारत की स्वाधीनता को 77 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन देश का एक बड़ा हिस्सा आज भी अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है, ये हैं डिनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय, जिन्हें हम DNT/NT/SNT के नाम से जानते हैं। अनुमान लगाया जाता है कि इनकी जनसंख्या 8 से 11 करोड़ के बीच है, पर विडंबना यह है कि भारत की किसी भी राष्ट्रीय जनगणना ने इन्हें कभी अलग श्रेणी में नहीं गिना। इसी कारण 2027 की प्रस्तावित जनगणना को लेकर इन समुदायों में नई आशा जन्मी है, क्योंकि पहली बार उनकी पहचान साफ़-साफ़ दर्ज होने की संभावना बन रही ह
250 वर्ष पहले स्वप्न में आए अतुलित बलधामा, प्रकट हुई हनुमान जी की दिव्य प्रतिमा
छह दशकों के वामपंथी उग्रवाद की समाप्ति के बाद नये युग का आरंभ
विदेशी निधि से धर्मांतरण : बदल रही है भारत की नीति
रामजी का युद्ध सत्ता के लिये नहीं, सत्य की स्थापना के लिये था
आज भी रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उससे आजीवन अपनी रक्षा और सम्मान की प्रतिज्ञा लेती है। भाई भी यह वचन देता है कि वह हर परिस्थिति में अपनी बहन की सुरक्षा करेगा। यही आदर्श हमारी भारतीय संस्कृति की विशिष्टता है, कि यहाँ नारी को मात्र एक व्यक्ति नहीं, संस्कारों की जननी, परिवार की धुरी और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
विनोद जोहरी- संक्रान्ति का अर्थ है, ‘सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण (जाना)’. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है. पूरे वर्ष में कुल 12 संक्रान्तियां होती हैं. लेकिन इनमें से चार संक्रांति मे
बालासोर: 3 जून ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण रेल दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सैकड़ों स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। संघ के स्वयंसवकों ने करीब 500 यूनिट रक्तदान किया है। बालेश्वर जिले के बाहनगा रेलवे स्टेशन के निक
संघ का सेवा कार्य- दस दिवसीय दन्त चिकित्सा शिविर का आयोजन सैकड़ों की संख्या में नागरिकों ने उठाया लाभ नागरिकों ने संघ के कार्य को सराहा भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेवा विभाग के द्वारा
सेवागाथा – वैदिक परंपराओं का पुनर्जागरण सुरभि शोध संस्थान (वाराणसी)
सेवागाथा - हर मुश्किल के साथी।
राष्ट्र सेविका समिति ने बनाई कोविड संजीवनी हेल्प लाइन
बालाघाट -अयोध्या में श्री राम लला का मंदिर 500 वर्षों के बाद पुनः बनने को अब तैयार है. सैकड़ों वर्षो के प्रतीक्षा के बाद एक भव्य राम मंदिर के लिए पूरा देश उत्सुक है. देश का हर समाज हर वर्ग हर पंथ इसमें अपना सहयोग देना चाहता है. इसी वजह से श्री राम मंदिर
नेताजी की 125वीं जयंती एवं पराक्रम दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने आयोजित किया रक्तदान शिविर और विशेष व्याख्यान भोपाल। कोरोना काल
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए देशभर में निधि समर्पण अभियान प्रारंभ हो गया है. मंदिर की नींव को लेकर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं. जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होने की आशा है. निधि समर्पण अभियान और श्रीराम मंदिर निर्माण को ले
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए 15 जनवरी से 14 फरवरी 2021 तक मध्यप्रदेश में जन-जन को जोड़कर निधि समर्पण के अंतर्गत राशि संग्रह की जाएगी, इसके लिए शनिवार राजधानी भोपाल में विस्तृत योजना बनी है। इसमें आम लोग कूपन से भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण में अपनी श्रद्धा निधि समर्पण राशि दे सकेंगे। जिसके लिए 10 रुपये, 100 रुपये और 1000 रुपये के कूपन तैयार किए गए हैं। इसके अलावा जिन्हें इससे अधिक राशि देनी है वे डीडी, चेक या रसीद-बुक से अपने पेन नंबर के साथ दे सकेंगे।