संघ शिक्षा वर्ग-विशेष: बैतूल में 'मातृ-हस्त भोजन' के माध्यम से समाज और संघ का जुड़ाव; पंच परिवर्तन का मिला संदेश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यभारत प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग (व्यवसाय) ब्यावरा में बुधवार को मातृहस्त भोजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ, जिसमें 106 परिवारों की मातृशक्ति अपने हाथों से भोजन बनाकर लायी, सभी शिक्षार्थियों के साथ में बैठकर परिवार सहित भोजन किया व उन्हें भी भोजन करवाया।
सभी राज्य सरकारें सड़कों पर नमाज़ को सख्ती से रोकें – विश्व हिन्दू परिषद
मंदिर मुक्ति हेतु सर्वोच्च न्यायालय में पुनः शुरू होगी ऐतिहासिक सुनवाई – आलोक कुमार जी
“लोकमाता अहिल्याबाई: भारतीय नारी की दिव्य चेतना”
स्व के आलोक में तप, त्याग और तितिक्षा जैसे गौरवशाली भारतीय मूल्यों को मिट्टी में गूंथकर यदि एक हिंदुत्व की मूर्ति गढ़ी जाए, तो उस मूर्ति का नाम होगा ‘वीर विनायक दामोदर सावरकर परंतु वीर सावरकर का नाम आते ही रंगे सियारों और लाल श्वानों में दहशत का वातावरण निर्मित हो जाता है और हृदय की धड़कन तेज हो जाती हैं। कतिपय लोगों की तो हृदय गति ही रुकने लगती है।
28 मई भारतीय इतिहास का वह गौरवपूर्ण दिवस है, जब भारतभूमि ने एक ऐसे महापुरुष को जन्म दिया, जिसने अपने विचार, संघर्ष, साहित्य और अदम्य राष्ट्रभक्ति से स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की। यह महान विभूति थे विनायक दामोदर सावरकर, जिन्हें सम्पूर्ण राष्ट्र “वीर सावरकर” के नाम से श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है।
भारत की सांस्कृतिक चेतना, जनजातीय अस्मिता और राष्ट्रीय एकात्मता का एक ऐतिहासिक अध्याय 24 मई 2026 को उस समय लिखा गया, जब देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित लाल किला में “सांस्कृतिक समागम 2026” के अंतर्गत जनजातीय समाज का अभूतपूर्व महासंगम आयोजित हुआ।
आज के जमाने का गंगा दशहरा
विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर जब हम प्रकृति संरक्षण की वैश्विक चर्चाओं में शामिल होते हैं, तो अक्सर इसे केवल एक वैज्ञानिक चुनौती के रूप में देखा जाता है। प्रजातियों का सूचकांक, पारिस्थितिकी संतुलन और जेनेटिक डेटा निस्संदेह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भारतीय परिप्रेक्ष्य में जैव विविधता केवल प्रयोगशालाओं का विषय नहीं, बल्कि हमारे हज़ारों वर्षों पुराने जीवन-दर्शन की आत्मा है।
भारत की लोकतांत्रिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव का वैश्विक उद्घोष
नॉर्वे के ओस्लो में ग्लोबल टूलकिट के प्रोपेगैंडा वाली बात कोई नहीं है। पत्रकार के भेष में जिस हेले लेंग ने अपने ही देश नॉर्वे के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। जब भारत और नॉर्वे अपने महत्वपूर्ण फैसलों को विश्व के समक्ष रख रहे हों।जहां प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं है, प्रेस ब्रीफिंग हो। जहां दोनों देशों के प्रमुख प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री जोनास द्विपक्षीय संबंधों, फैसलों को प्रेस को ब्रीफ करने के बाद वहां से अपने दूसरे कार्यक्रमों के लिए जा रहे हों। उसी वक्त अचानक वहाँ जानबूझकर योजनाबद्ध तौर पर अपना
रामजी का युद्ध सत्ता के लिये नहीं, सत्य की स्थापना के लिये था
आज भी रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधकर उससे आजीवन अपनी रक्षा और सम्मान की प्रतिज्ञा लेती है। भाई भी यह वचन देता है कि वह हर परिस्थिति में अपनी बहन की सुरक्षा करेगा। यही आदर्श हमारी भारतीय संस्कृति की विशिष्टता है, कि यहाँ नारी को मात्र एक व्यक्ति नहीं, संस्कारों की जननी, परिवार की धुरी और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
विनोद जोहरी- संक्रान्ति का अर्थ है, ‘सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संक्रमण (जाना)’. एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति के बीच का समय ही सौर मास है. पूरे वर्ष में कुल 12 संक्रान्तियां होती हैं. लेकिन इनमें से चार संक्रांति मे
गीता जयंती प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। बताया जाता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण के मुख से गीता के उपदेश निकले थे। पूरे विश्व भर में मात्र श्रीमद भगवत गीता ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष
बालासोर: 3 जून ओडिशा के बालासोर में हुई भीषण रेल दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सैकड़ों स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। संघ के स्वयंसवकों ने करीब 500 यूनिट रक्तदान किया है। बालेश्वर जिले के बाहनगा रेलवे स्टेशन के निक
संघ का सेवा कार्य- दस दिवसीय दन्त चिकित्सा शिविर का आयोजन सैकड़ों की संख्या में नागरिकों ने उठाया लाभ नागरिकों ने संघ के कार्य को सराहा भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सेवा विभाग के द्वारा
सेवागाथा – वैदिक परंपराओं का पुनर्जागरण सुरभि शोध संस्थान (वाराणसी)
सेवागाथा - हर मुश्किल के साथी।
राष्ट्र सेविका समिति ने बनाई कोविड संजीवनी हेल्प लाइन
बालाघाट -अयोध्या में श्री राम लला का मंदिर 500 वर्षों के बाद पुनः बनने को अब तैयार है. सैकड़ों वर्षो के प्रतीक्षा के बाद एक भव्य राम मंदिर के लिए पूरा देश उत्सुक है. देश का हर समाज हर वर्ग हर पंथ इसमें अपना सहयोग देना चाहता है. इसी वजह से श्री राम मंदिर
नेताजी की 125वीं जयंती एवं पराक्रम दिवस के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई ने आयोजित किया रक्तदान शिविर और विशेष व्याख्यान भोपाल। कोरोना काल
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए देशभर में निधि समर्पण अभियान प्रारंभ हो गया है. मंदिर की नींव को लेकर विशेषज्ञ मंथन कर रहे हैं. जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होने की आशा है. निधि समर्पण अभियान और श्रीराम मंदिर निर्माण को ले
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए 15 जनवरी से 14 फरवरी 2021 तक मध्यप्रदेश में जन-जन को जोड़कर निधि समर्पण के अंतर्गत राशि संग्रह की जाएगी, इसके लिए शनिवार राजधानी भोपाल में विस्तृत योजना बनी है। इसमें आम लोग कूपन से भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण में अपनी श्रद्धा निधि समर्पण राशि दे सकेंगे। जिसके लिए 10 रुपये, 100 रुपये और 1000 रुपये के कूपन तैयार किए गए हैं। इसके अलावा जिन्हें इससे अधिक राशि देनी है वे डीडी, चेक या रसीद-बुक से अपने पेन नंबर के साथ दे सकेंगे।