अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस : भारतीय ज्ञान परंपरा का वैश्विक आलोक

"योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं, बल्कि मन, बुद्धि, आत्मा और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करने का भारतीय विज्ञान है।"

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    21-Jun-2026
Total Views |
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

 
डॉ. भूपेन्द्र कुमार सुल्लेरे
वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक
 
 
प्रतिवर्ष 21 जून को विश्वभर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह केवल एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्षों पुरानी ज्ञान परंपरा, जीवन दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का वैश्विक उत्सव है। योग भारत की आत्मा में समाया हुआ है। यह भारतीय संस्कृति की उस विरासत का प्रतीक है जिसने मानव जीवन को समग्रता में देखने का दृष्टिकोण दिया।
 
 
भारतीय ऋषियों-मुनियों ने हजारों वर्ष पूर्व यह अनुभव कर लिया था कि मनुष्य का स्वास्थ्य केवल शरीर की शक्ति से नहीं, बल्कि मन की शांति, विचारों की पवित्रता और आत्मा के संतुलन से निर्मित होता है। इसी अनुभूति से योग का जन्म हुआ। वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता तथा महर्षि पतंजलि के योगसूत्रों में योग को जीवन के सर्वोच्च अनुशासन के रूप में वर्णित किया गया है।
 
 
विश्व को भारत का अनुपम उपहार
 
 
वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को अभूतपूर्व वैश्विक समर्थन प्राप्त हुआ और संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। यह भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और विश्व कल्याण की भावना की ऐतिहासिक स्वीकृति थी।
 
 
21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन माना जाता है और भारतीय परंपरा में इसे आध्यात्मिक उन्नति तथा ऊर्जा के दृष्टिकोण से विशेष महत्व प्राप्त है। इसलिए इस तिथि का चयन भी भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप है।
 
 
योग : भारतीयता का जीवन दर्शन
 
 
भारत में योग केवल व्यायाम नहीं है। यह जीवन जीने की कला है। योग का अर्थ है - जोड़ना। शरीर को मन से, मन को बुद्धि से, बुद्धि को आत्मा से और व्यक्ति को परम चेतना से जोड़ना।
 
 
सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, ध्यान, आसन, यम, नियम, धारणा और समाधि जैसे विविध आयाम योग को एक संपूर्ण जीवन पद्धति बनाते हैं। भारतीय संस्कृति में दिन की शुरुआत सूर्योपासना से होती रही है। सूर्य नमस्कार केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और ऊर्जा के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
 
 
आज के समय में योग की आवश्यकता क्यों?
 
 
वर्तमान युग तकनीकी प्रगति का युग है। आधुनिक जीवन सुविधाओं से परिपूर्ण तो हुआ है, किंतु इसके साथ तनाव, अवसाद, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं।
 
 
मोबाइल, कंप्यूटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मनुष्य का शारीरिक श्रम कम हुआ है और मानसिक दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में योग एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आता है।
 
 
योग
- शरीर को स्वस्थ और लचीला बनाता है।
- मानसिक तनाव को कम करता है।
- एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ाता है।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।
- जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार करता है।
- व्यक्ति को प्रकृति और समाज के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
 
 
योग : विज्ञान और आध्यात्म का संगम
 
 
कभी योग को केवल आध्यात्मिक साधना माना जाता था, किंतु आज विश्व के अनेक वैज्ञानिक अनुसंधानों ने इसके स्वास्थ्य लाभों को प्रमाणित किया है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी स्वीकार करता है कि नियमित योगाभ्यास तनाव नियंत्रण, श्वसन क्षमता वृद्धि, हृदय स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
 
 
यही कारण है कि आज अमेरिका, यूरोप, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया सहित विश्व के अधिकांश देशों में योग को अपनाया जा रहा है। लाखों लोग भारतीय योग पद्धति के माध्यम से स्वस्थ और संतुलित जीवन की ओर अग्रसर हैं।
 
 
नई पीढ़ी और योग 
 
 
आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखे, बल्कि इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाए। विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में योग के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की मांग है।
 
 
योग हमारी सांस्कृतिक पहचान भी है और स्वस्थ भविष्य की आधारशिला भी। जिस देश ने विश्व को योग दिया, उस देश के नागरिकों का दायित्व है कि वे इस अमूल्य विरासत को समझें, अपनाएं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की उस सनातन चेतना का उत्सव है जो "सर्वे भवन्तु सुखिनः" का संदेश देती है। योग हमें स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन प्रदान करता है। आज जब पूरा विश्व तनाव और असंतुलन से जूझ रहा है, तब भारत की योग परंपरा मानवता के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है।
 
 
योग वास्तव में भारत की आत्मा है, भारतीयता का प्राण है और विश्व कल्याण का मार्ग है। इसलिए योग को केवल एक दिन नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की वास्तविक सार्थकता है।