भारत में अचानक बढ़ी कट्टरपंथियों की सक्रियता : कहीं यह बंगलादेशी कट्टरपंथियों का आव्हान का प्रभाव तो नहीं

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    19-May-2026
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-रमेश शर्मा
 
 
इन पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद पूरे देश में कट्टरपंथी गतिविधियों की आक्रामकता बढ़ी है। जिस प्रकार केरल के मुख्यमंत्री का नाम आया, तमिलनाड में नये मुख्यमंत्री के निर्णय, पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न नगरों में सड़क पर नमाज पढ़ने की जिद और संभल एवं भोपाल की घटनाओं में इसकी स्पष्ट झलक है। यह एक विचित्र संयोग है कि इन घटनाओं में वृद्धि बंगलादेश के कट्टरपंथियों की उन अपीलों के बाद तेजी आई जिनमें ममता बनर्जी से विद्रोह करने और मुसलमानों से उनका साथ देने का आव्हान किया गया था।
 
 
इन पांच राज्यों के चुनाव परिणामों ने कयी प्रकार के संदेश दिये हैं। जो भविष्य में भारत के सामाजिक और राजनैतिक जीवन पर पड़ने प्रभाव का संकेत दे रहे हैं। इसमें चौंकाने वाला घटनाक्रम बंगलादेश के कट्टरपंथियों की ममता बनर्जी से विद्रोह का झंडा उठाने की अपील का था। कट्टरपंथियों ने उनके समर्थन में सड़क पर आने का विश्वास भी दिलाया था। यद्यपि ममता बनर्जी ने तो विद्रोह का झंडा नहीं उठाया लेकिन पश्चिम बंगाल के आसनसोल से कलकत्ता, भोपाल तथा संभल आदि नगरों में मुसलमानों में संगठित तीखी प्रतिक्रियाओं में अचानक वृद्धि देखी गई। इन घटनाओं से यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि इन दिनों अचानक कौनसी शक्तियाँ भारत में तीखापन ला रहीं हैं। भारत के राज्यों में सत्ता परिवर्तन पहली बार नहीं हुआ। लेकिन पश्चिम बंगाल के परिणाम की चर्चा भारत के भीतर ही नहीं भारत के बाहर लंदन और अमेरिका के मीडिया में भी सुर्खियाँ बनीं। पाकिस्तान और बांग्लादेश के मीडिया में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की हार और भाजपा की जीत को सबसे अधिक कवरेज दिया। इन परिणामों पर ऐसी प्रतिक्रियाएँ आईं मानों कोई अनूठा चित्र उभरा हो। इनमें सबसे अधिक प्रतिक्रियाएँ भारत के पड़ौसी देश बंगलादेश से आईं। बंगलादेश का शायद कोई ऐसा कट्टरपंथी नेता और संगठन बचा हो जिसकी प्रतिक्रिया न आई हो। ये प्रतिक्रियाएँ साधारण नहीं थीं, ये सीधी सीधी बौखलाहट थी। इन प्रतिक्रियाओं में बंगलादेश के अठारह करोड़ मुसलमानों द्वारा तो विद्रोह में साथ देने का आश्वासन दिया ही गया था। इसके साथ परोक्ष रूप से भारत के मुसलमानों को भी उकसाया गया था।
 
 
कट्टरपंथियों को आक्रामक बनाकर भारत में अशांति और अराजकता फैलाने का कुचक्र भी
 
यह तथ्य अपने आप में विचारणीय है कि बंगलादेश के कट्टरपंथियों की अपील के बाद ही भारत के विभिन्न नगरों में साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएँ बढ़ीं हैं। बंगलादेश के कट्टरपंथियों के वक्तव्य दो प्रकार के थे। एक तो भारत के मुसलमानों की सुरक्षा एवं हितों के संरक्षण की बात कही गई और दूसरी ममता बनर्जी से बंगाल को स्वतंत्र घोषित करने की अपील की गई। भारत में मुसलमानों के हित संरक्षण की बात उठाने वालों में बंगलादेश सत्तारूढ़ दल वीएनपी के नेता भी हैं। बीएनपी के सूचना सचिव अजीजुल बनी हेलाल ने तो यहाँ तक कहा कि "पश्चिम बंगाल में टीएमसी की करारी हार देखकर मैं स्तब्ध हूं। वहीं नेशनल सिटिजंस पार्टी के नेता नाहिद इस्लाम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत के सभी अल्पसंख्यकों और कमज़ोर वर्गों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इन प्रतिक्रियाओं में राजनैतिक और अपनी विदेश नीति के अंतर्गत शब्दों को सीमित तो रखा गया है लेकिन इनमें मुसलमानों के बीच भय का वातावरण बनाना और उन्हें एकजुट रखने की मंशा बहुत स्पष्ट है। वहीं बंगलादेश के कुछ कट्टरपंथी नेताओं ने तो सीधा सीधा विद्रोह का झंडा दिल्ली पर फहराने की अपील कर डाली। एक कट्टरपंथी संगठन प्रमुख नूरुल हुदा वक्तव्य तो उसी दिन आया जिस दिन अपनी पराजय के बावजूद ममता बनर्जी ने त्यागपत्र देने से इंकार कर दिया था। नुरुल हूदा ने ममता बनर्जी द्वारा त्यागपत्र न देने के निर्णय पर बधाई देकर बंगाल को 'स्वतंत्र देश' घोषित करने का आव्हान किया। उन्होंने यह घोषणा भी की कि यदि ममता बनर्जी ऐसा करती हैं तो बंगलादेश के मुसलमान उनके साथ हैं। बांग्लादेश के एक अन्य कट्टरपंथी मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को मुसलमानों के विरुद्ध बताया और यह धमकी भी दी कि यदि पश्चिम बंगाल में मुसलमान सुरक्षित नहीं हैं, तो बांग्लादेश में हिंदुओं को भी सुरक्षित रहने नहीं दिया जाएगा।
 
 
उन्होंने भी ममता बनर्जी से विद्रोह का उठाने का आव्हान किया औ, आश्वस्त किया कि बंगलादेश के मुसलमान उनके साथ हैं। इनायतुल्लाह अब्बासी इससे पहले कयी बार नई दिल्ली में इस्लामिक झंडा फहराने और मदरसों को हथियारों से लैस कर मिलिट्री बेस बनाने का आव्हान कर चुके हैं। मौलाना इनायतुल्लाह अब्बासी बांग्लादेश के धार्मिक उपदेशक भी है। उनकी सभाओं में बड़ी भीड़ उमड़ती है। वे अपने भारत विरोधी भड़काऊ भाषणों केलिये ही जाने जाते हैं। इन भड़काऊ भाषा बांग्लादेश जमाते इस्लामी के अमीर डॉ. शफ़ीक़ुर रहमान की भी है। उन्होंने सोशल मीडिया की अपनी एक पोस्ट में कहा कि "इस असाधारण मामले में बंगलादेश पूरी तरह उनके साथ रहेगा। उन्होने भी दावा किया है कि यदि ममता बनर्जी स्वतंत्रता की घोषणा करती हैं तो बांग्लादेश के 17 करोड़ लोग उनके साथ खड़े होंगे और उन्हें एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देंगे। उनका यह वक्तव्य बांग्लादेश के एक समाचारपत्र ढाका ट्रिब्यून में भी छपा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को मुसलमानों की सुरक्षा और अधिकार से जोड़ा और भारत सरकार से मुसलमानों के हितों की रक्षा करने की अपील भी की। ढाका ट्रिब्यून के अनुसार शफ़ीक़ुर रहमान ने कहा, "हम भारत सरकार से अपील करेंगे कि किसी भी धर्म, जाति या जातीय समूह को निशाना बनाकर नुक़सान न पहुंचाया जाए"। यह सभी वक्तव्य जो चाहे मुसलमानों की हित चिंता के हों अथवा ममता बनर्जी से विद्रोह की अपील करके साथ देने की हो, इन दोनों संदेशों में मुसलमानों को भारत राष्ट्र की मूलधारा से अलग रखने का कुचक्र है। इसी की नींव पर पाकिस्तान और बांग्लादेश खड़े हुये। अलगाव के इसी भाव को खाद पानी देने का काम बंगलादेश के ये कट्टरपंथी कर रहे हैं।
 
 
भारत के विभिन्न नगरों में तनाव की नई घटनाएँ
 
बंगलादेश के कट्टरपंथियों के ऐसे वक्तव्यों के बाद भारत के विभिन्न नगरों में तनाव की नई घटनाएँ सामने आईं। पश्चिम बंगाल के आसनसोल और कलकत्ता सहित विभिन्न नगरों में मुसलमानों का एक बड़ा समूह सड़क पर नमाज अदा करने की अनुमति देने की माँग पर अड़ गया। इससे सामाजिक तनाव और प्रशासनिक टकराव की स्थिति बनी। सड़क पर नमाज पढ़ने की अनुमति केलिये मुसलमानों के सड़कों पर आने की घटनाएँ केवल पश्चिम बंगाल की नहीं हैं। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि कयी प्राँतों में ऐसी माँग उठने लगी तथा कयी नगरों में टकराव की स्थिति भी बनी। वहीं भोपाल में एक कथित लव जिहाद की घटना की प्रतिक्रिया में भोपाल नगर की पुरानी बस्ती में मुस्लिम समाज के हजारों हजारों लोग सड़कों पर उतर आये। यद्यपि मुस्लिम समाज के ही कुछ धर्म गुरुओं ने लोगों से शांति पूर्वक अपनी बात रखने का आव्हान किया। लोग माने भी लेकिन फिर भी पथराव और सड़क चलते लोगों के साथ की गई मारपीट के कारण तनाव उत्पन्न हो गया। इन तनावों के बीच ही धार की भोजशाला पर इंदौर हाईकोर्ट का निर्णय आया। इस निर्णय के बाद मौलाना मदनी से लेकर एआईएमआईएम ओबेसुद्दीन औबेसी सहित नेताओं के आक्रामक वक्तव्यों ने भी वातावरण में एक नया खिंचाव भी बढ़ाया है।
 
 
अतिरिक्त सावधानी आवश्यक
 
समय की यात्रा में वक्तव्य के विषय भले बदल जाये लेकिन कटरपंथी और अलगाववादियों की धारा कभी नहीं बदलती। वे बदलते विषयों को भी अपने मूल ध्येय को पूरा करने कलिये उठाते हैं। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के पदारूढ़ होने के बाद भले बंगलादेश के कट्टरपंथियों के वक्तव्य रुक गये हों लेकिन उनकी गतिविधि रुकेगी इसकी संभावना कम है। बंगलादेश की सीमा से लगे सभी प्रांतों में बंगलादेश से योजनापूर्वक घुसपैठ होती रही है। यह घुसपैठ साधारण नहीं है। इसका उद्देश्य भारतीय प्राँतों में जनसांख्यिकीय अनुपात को बदलना है। इसलिये उनके षड्यंत्र रुकेंगे इसकी संभावना कम है। वे नये रूप में सामने आयेंगे अतएव समूचे भारतवासियों को और विशेषकर सीमा प्राँतों की सभी सरकारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है।