सीहोर। भारत का इतिहास किसी राज्य को पराजित करने का नहीं रहा है इतिहास इस बात का साक्षी है कि भारत ने किसी पर आक्रमण नहीं किया, जबकि भारत की सभ्यता, संस्कृति और धर्म को समाप्त करने के लिए सैंकड़ों बार आक्रमण हुए हैं। हमारे देश की सभ्यता पराजित करने की नहीं, बल्कि हृदय पर विजय प्राप्त करने की शिक्षा देती है। यही कारण है कि हमारे महापुरूषों ने धर्म और सद्भाव का विचार लेकर विश्व भर में भ्रमण किया और धर्म का प्रचार किया। यह बात जिला मुख्यालय पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी को संबोधित करते हुए भैयाजी जोशी ने कही। वह यहां 100 वर्ष की संघ यात्रा के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।
श्री जोशी ने कहा कि जब तक भारत में धर्म है तब तक विश्व में धर्म है जिस दिन भारत में धर्म समाप्त हो जाएगा। उस दिन विश्व में भी धर्म नाम की कोई चीज नहीं बचेगी। धर्म की पहली सीढ़ी उपासना है हर व्यक्ति अलग-अलग उपासना करता है, उपासना धर्म तक सीमित नहीं है। धर्म की दूसरी सीढ़ी आचार धर्म है, हमारा आचरण शुद्ध होना चाहिए। जब तक आंतरिक शुद्धता नहीं रहेगी, हम सिद्धांतों पर चलने वाले नहीं रहेंगे, और बाहृय आचरण नाटक के समान रहेगा। इसके लिए हमें दोनों आचरण एक समान रखना होगा, जो व्यक्ति आंतरिक रूप से शुद्ध है जरूरी नहीं कि वह बाहरी रूप से भी शुद्ध हो।
18 साल तक पालन-पोषण करना जिन्होंने जन्म दिया उनका कर्त्तव्य है। 18 वर्ष पूरे होने पर हमारी जिम्मेदारी नहीं। कानूनी तौर पर हमारी जिम्मेदारी पूरी हो गई, यह कहना सही नहीं है। क्या कानून से बच्चों का पालन होगा। कौन सिखाएगा यह विश्व को पारिवारिक व्यवस्था। हमें आत्म केन्द्रता से बाहर आना, उपभोगवाद से बचना, पतन की ओर जा रही अपनी व्यवस्था को संरक्षित करना यही भारत की एक विशेष व्यवस्था है। जो समाज निर्माण का केन्द्र है हमारी संस्कृति में मातृ देवो भव:, पितृ देवो भव: कहा गया है। यही संस्कार की पहली सीढ़ी है। उन्होंने पश्चिम देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां वयस्क होने पर माँ-बाप अपने बच्चों को पृथक कर देते हैं। इसके लिए वहां कानून भी बना है, लेकिन कानून के माध्यम से संस्कार नहीं दिए जा सकते।
हमें बच्चों को देश भक्ति सिखाना चाहिए, हमारे यहां 15 अगस्त, 26 जनवरी को देशभक्ति का ज्वार उठता है अगले दिन फिर भूल जाते हैं या फिर भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मैच होता है तो देशभक्ति जाग जाती है। पाकिस्तान से मैच जीतने पर आतिशबाजी चलाते हैं। जब चीन या पाकिस्तान का कोई आतंकी हमला होता है तो पूरा देश खड़ा होकर देशभक्ति दिखाता है। क्या हमको देशभक्ति दिखाने के लिए पाकिस्तान की आवश्यकता है। देशभक्ति हमेशा हमारे हृदय में होना चाहिए।
श्री जोशी ने कहा कि हमारे अकेले का कोई अस्तित्व नहीं है, हम समाज के साथ जुड़े हुए हैं वही हमारी पहचान है। सामूहिक एकता का संस्कार हमारी पहचान है। हम समाज को देने वाले बनेंगे यही हमारे संस्कार हैं। व्यक्ति में राष्ट्र धर्म होना चाहिए, समाज धर्म एक सामूहिकता का जीवन जीता है। उन्होंने कहा कि श्री रामचन्द्र से प्रेरित जो समाज होगा वह देश का गौरव होगा व सम्पूर्ण विश्व को भी प्रेरणा प्रदान करेगा। आज इस कार्य को करने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सामाजिक जीवन में है। यह कार्य संघ विगत 100 वर्षों से लगातार करता चला आ रहा है और आगे भी इसी संकल्प को लेकर अनवरत् यात्रा जारी रहेगी। प्रवाह जब आता है तो अपने साथ कचरा भी लेकर आता है, यह उसका स्वभाव है लेकिन उस कचरे को साफ करना स्वभाव है। कचरा आता रहेगा और उसे हम साफ करते रहेंगे।
अपने संबोधन में उन्होंने समाज में जाति, भेदभाव को समाप्त कर समानता और बंधुत्व स्थापित करने के लिए समाजिक समरसता को अपनाने पर बल दिया। भारतीय पारंपरिक परिवार प्रणाली को बचाने, परिवारों में संस्कार बढ़ाने और संयुक्त परिवार को बढ़ावा देने की सीख दी। वहीं पर्यावरण की सुरक्षा और प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वदेशी अपना कर भारतीय वस्तुओं को अपनी जीवनशैली में उपयोग करना हर नागरिक का कर्त्तव्य होना चाहिए, ताकि हमारा देश आत्म निर्भरता की ओर अग्रसर हो। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में नगर के प्रमुखजन मौजूद रहे।