पंच परिवर्तन से समाज में आएगा वास्तविक बदलाव : इंदापुरकर

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    15-Feb-2026
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प्रमुख जन गोष्ठी ग्वालियर
 
ग्वालियर। समाज परिवर्तन केवल विचार या वक्तव्यों से नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने से संभव है। पंच परिवर्तन - सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य को यदि जीवन शैली का हिस्सा बनाया जाए, तो समाज में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है। यह विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य क्षेत्र के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य यशवंत इंदापुरकर ने व्यक्त किए।
 
वे विनय नगर सेक्टर-4 स्थित जीपीएस स्कूल में आयोजित गरगज नगर की प्रमुख जन गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता लश्कर जिला संघचालक सुनील पाठक ने की, जबकि गरगज नगर संघचालक मानसिंह जादौन मंचासीन रहे।
 
मुख्य वक्ता इंदापुरकर ने कहा कि समाज की अनेक समस्याओं का समाधान शासन या व्यवस्था से अधिक नागरिकों के सहयोग और जिम्मेदारी से जुड़ा है। उन्होंने शहर में बढ़ती यातायात समस्या का उदाहरण देते हुए कहा कि नियमों की अनदेखी ही इसका प्रमुख कारण है, इसलिए प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह यातायात नियमों का पालन करे। उन्होंने पंच परिवर्तन के सभी विषयों को व्यक्तिगत जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
 
अपने उद्बोधन में उन्होंने संघ के सौ वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक गुरुजी के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक दौर में संघ को उपेक्षा और विरोध का सामना करना पड़ा, यहां तक कि उस पर तीन बार प्रतिबंध भी लगाए गए, लेकिन प्रत्येक प्रतिबंध के बाद संगठन और अधिक सशक्त होकर समाज के बीच खड़ा हुआ।
 
कार्यक्रम के प्रारंभ में एकल गीत नवल गौड़ ने प्रस्तुत किया। संचालन नगर कार्यवाह उदय यादव ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन नगर संघचालक मानसिंह जादौन ने किया। कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् के सामूहिक गान के साथ हुआ।
 
नि:स्वार्थ भाव से किया गया कार्य कभी विफल नहीं होता : वर्मा
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूर्ण होना इस सत्य का प्रमाण है कि नि:स्वार्थ भाव से किया गया कार्य कभी निष्फल नहीं होता। वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने केवल एक संगठन की स्थापना नहीं की, बल्कि खंडित होते समाज को ‘स्व’ की पहचान कराते हुए राष्ट्र निर्माण की एक दीर्घकालिक प्रक्रिया प्रारंभ की, जो आज वटवृक्ष का रूप ले चुकी है।

प्रमुख जन गोष्ठी ग्वालियर  
 
यह विचार संघ ग्वालियर विभाग के सह कार्यवाह डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने माधवगंज स्थित ब्रह्माकुमारी आश्रम में आयोजित माधव नगर की प्रमुख जन गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर संघचालक गोविंद गुप्ता ने की।
 
डॉ. वर्मा ने कहा कि संघ का उद्देश्य संख्या बल बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के भीतर अपनी संस्कृति, परंपरा और जड़ों के प्रति गौरव का भाव जगाना है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में समरसता, परिवार के भीतर संवाद और संस्कारों का संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय जीवन शैली को अपनाना, कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन तथा स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग से देश को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना ही इसका लक्ष्य है।
 
गोष्ठी में ब्रह्मकुमारी केंद्र की संचालिका आदर्श दीदी और प्रहलाद भाई ने समाजसेवा और आध्यात्मिक सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के प्रारंभ में भूपेंद्र भदौरिया ने “मन समर्पित, तन समर्पित…” गीत प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। संचालन धर्मवीर सिंह परिहार ने किया तथा आभार गोपाल जाटव ने व्यक्त किया।