विदेशी संस्थाएं एवं विदेशी कम्पनियाँ सिंहस्थ कुम्भ क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रतिबन्धित हों प्रस्ताव पारित
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में ‘विश्वमांगल्य स्वनाथ परिषद’ की अखिल भारतीय कार्यशाला गत 2, 3 एवं 4 अक्टूबर 2026 को सम्पन्न हुई। ‘हर बच्चे को माँ’ के संकल्प के साथ स्वनाथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ, स्वावलम्बन, स्वरोजगार, संस्कार एवं सुरक्षा के विषयों पर कार्य करते हुए संगठन एवं इसके उपक्रमों के विभिन्न आयामों पर प्रस्तुति और चर्चा मंथन हुआ। ‘आओ कण्व बनें हम’ की प्रेरणादायी संकल्पना और नियमित उपक्रम ‘हर बच्चे को माँ’ यह इस कार्यशाला का केंद्रीय भाव रहा। इस आधार पर विविध विषयों द्वारा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया।
विश्वमांगल्य स्वनाथ परिषद (VMSP) सम्पूर्ण भारत में अनाथ (स्वनाथ) और CNCP बच्चों के कल्याण एवं विकास के लिए कार्य करने वाला देशव्यापी संगठन है। इन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए हम उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, व्यावसायिक और सैन्य प्रशिक्षण आदि के लिए प्रयास करते हैं।
दिनांक 2 अक्टूबर को कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर विश्वमांगल्य स्वनाथ परिषद के मार्गदर्शक मा. प्रशांत हरतालकर, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मा. श्री सुधीर गोयल जी, स्वनाथ परिषद की अखिल भारतीय संयोजिका सौ. अंजली देव एवं अ.भा निदेशक नीरज चौधरकर जी ने दीपप्रज्वलन कर कार्यशाला उद्घाटन किया। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथी मा. श्री सुधीरजी गोयल ने समाज की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए स्वनाथ परिषद जैसी युवा उर्जावान संस्थाएं सामने आकर बदलाव कर सकती हैं यह विश्वास जताया उन्होने सेवाधाम आश्रम मे होने वाली मानव सेवा गतिविधियों के बारे मे जानकारी प्रदान की जहाँ दिव्यांग स्वनाथ जनों की सेवा की जाती हैl अपने प्रास्ताविक में सौ. अंजली देव ने इस कार्यशाला का उद्देश्य और संकल्पना पर प्रकाश डाला
2 से 4 अक्टूबर 2026 तक सम्राट विक्रमादित्य भवन में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न प्रांतों से आए कार्यकर्ताओं ने सहभागिता करते हुए स्वनाथ के विशेषज्ञों द्वारा विविध विषयों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। जिसमें स्वनाथ संकल्पना एवं पृष्ठभूमि, समस्या, स्वनाथ कौन एवं वर्तमान परिस्थिति पर विस्तार से विचार रखा गया। विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के कार्यों एवं उनकी भूमिका, After Caring, संगठनात्मक, संरचना, स्वनाथ परिषद के उपक्रम तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन, सदाचार सभा के माध्यम से संस्कार, नैतिकता एवं सामाजिक दायित्वों के चिंतन के साथ हुआ। ‘Foster Caring’ विषय पर श्री कृपाशंकर चौबे ने विभिन्न योजनाओं, दत्तक प्रक्रिया तथा मिशन वात्सल्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इस सत्र के माध्यम से बच्चों के संरक्षण एवं पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में समाज और संस्थाओं की भूमिका को स्पष्ट किया गया। सेवाधाम आश्रम प्रकल्प की भेट के माध्यम से प्रत्यक्ष कार्य का अनुभव प्राप्त करने का अवसर कार्यकर्ताओं को मिला।
‘हर बच्चे को माँ’ का संकल्प बने सामाजिक अभियान के माध्यम से यह संदेश प्रभावी रूप से सामने आया कि प्रत्येक बच्चे को केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि ममता, जिसमें स्वनाथ बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ, स्वावलम्बन, स्वरोजगार, संस्कार एवं सुरक्षा तथा समाज की सक्रिय भूमिका, परिवार जैसा वातावरण और सम्मानपूर्ण जीवन प्राप्त होना चाहिए। इसके लिए समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं, कार्यकर्ताओं और विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाओं के समन्वय की आवश्यकता है।
इसके साथ ही कई सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के पश्चात एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। आगामी सिंहस्थ में गुम हो जाने वाले या अनाथ बच्चों के बारे में किसी भी बाहरी संस्था को सहभागी ना किया जाए। इस विषय में विश्व मांगल्य स्वनाथ परिषद हर संभव प्रयास करेगा यह प्रस्ताव भी पारित किया गया। विदेशी स्वयंसेवी संस्थाओं या विदेशी कंपनियों को इस क्षेत्र में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
कार्यशाला का समापन सुश्री पूजा पाठक विश्व मांगल्य सभा अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख ने किया। तीन दिनों तक चले विविध सत्रों से प्राप्त ज्ञान, अनुभव एवं दिशा को कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने का संकल्प कार्यकर्ताओं ने लिया।
चर्चा मंथन, प्रबोधन और प्रशिक्षण के साथ ही आगामी समय में स्वनाथ सहायता केंद्र (Helpline, स्वनाथ रोजगार केंद्र (Employment Exchange), स्वनाथ उद्योग सेवा केंद्र, स्वनाथ स्वास्थ्य सहायता केंद्र, स्वनाथ अनुसंधान केंद्र (Svanath Research Center), स्वनाथ इंटर्नशिप संचालित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। उज्जैन की आध्यात्मिक भूमि पर महाकाल जी के आशीर्वाद से संपन्न हुई यह अखिल भारतीय कार्यशाला विश्वमांगल्य स्वनाथ परिषद के लिए केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम न रहकर सेवा, संस्कार और संगठन को एक नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंथन सिद्ध हुई।