जागते रहो हिंदुओं, फिर कोई मुगल आपके ऊपर आक्रमण ना कर दें - पंडित प्रदीप मिश्रा

13 Jan 2026 12:14:07

pradeep mishra
 
 
भोपाल| ओल्ड कैंपियन खेल मैदान, अरेरा कॉलोनी, समिधा बस्ती में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन उत्साह, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना के वातावरण में संपन्न हुआ। सम्मेलन में नाट्य मंचन, देशभक्ति गीतों और कवि सम्मेलन के माध्यम से हजारों की संख्या में उपस्थित नागरिकों ने राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक गौरव का अद्भुत दृश्य देखा। कार्यक्रम स्थल पर पूरा वातावरण भारत माता के जयघोष और देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत रहा।
 
कार्यक्रम में मंच पर विख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह बौद्धिक प्रमुख श्री दीपक विस्पुते जी तथा प्रांत सह संघचालक डॉ. राजेश सेठी जी विराजमान रहे।
 
संगठन नहीं, समाज परिवर्तन का विचार - दीपक विस्पुते जी
 
जनसमूह को संबोधित करते हुए श्री दीपक विस्पुते जी ने कहा कि आज का दिन भी विशेष है और यह आयोजन भी विशेष है। उन्होंने कहा कि भारत भूमि परोपकार, त्याग और समर्पण की जननी है। इसी धरती पर जन्मे गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान वर्ष को हम स्मरण कर रहे हैं, जिन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया। इसी वर्ष भगवान बिरसा मुंडा के जीवन के 150 वर्ष भी पूर्ण हो रहे हैं, जिन्होंने विदेशी षड्यंत्रों और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया।
 

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उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को 150 वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि क्रांति का उद्घोष है, जिसे सुनकर हजारों क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा निरंतर चल रही है और प्रतिदिन विकसित हो रही है। इस यात्रा का नित्य साधना केंद्र शाखा है।
 
श्री विस्पुते जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के संदेश को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक नियमित रूप से पहुंचाने का कार्य संघ कर रहा है। कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है जब उसका समाज आगे बढ़ता है। हमें किसी संकट के कारण संगठित नहीं होना चाहिए, बल्कि संगठन हमारा स्वभाव बनना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई सामान्य संस्था नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का महाआंदोलन है।
 
उन्होंने समाज निर्माण के पांच सूत्रों पर बल देते हुए कहा कि समाज में यह भाव स्थापित होना चाहिए कि हिंदू, हिंदू का भाई है। परिवार में संस्कार और मूल्यों की स्थापना हो, पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक व्यक्ति अपनी भूमिका निभाए, संविधान का अक्षरशः पालन करते हुए नागरिक कर्तव्यों का निर्वहन करे और स्वदेशी, स्वधर्म तथा स्वराज के भाव को जीवन में उतारे। यदि हम इन सिद्धांतों को अपनाते हैं, तो स्वामी विवेकानंद का वह स्वप्न साकार होगा जिसमें उन्होंने भारत माता को सिंहासन पर आरूढ़ होते देखा था।
 
 
हिंदू समाज का जागरण आवश्यक - पंडित प्रदीप मिश्रा जी
 
पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हिंदू समाज को यह सिखाया है कि स्वयं की और समाज की रक्षा कैसे की जाती है। उन्होंने कहा कि आज सनातन धर्म में हिंदुओं को जगाने के लिए हिंदू सम्मेलन आयोजित करने पड़ रहे हैं, यह अपने आप में चिंतन का विषय है।
 
उन्होंने कहा कि चातुर्मास के चार महीने हिंदू समाज जागता है, लेकिन यह जागरण स्थायी होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि यदि आज भी हम केवल अपने मोबाइल में उलझे रहेंगे, तो इतिहास स्वयं को दोहरा सकता है। इसलिए जागते रहना आवश्यक है, ताकि कोई नया आक्रमण या गुलामी हम पर न थोप सके।
 


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पंडित मिश्रा जी ने माता पार्वती और भगवान शिव की कथा के माध्यम से कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा में मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारे शास्त्र कहते हैं कि एक स्त्री पूरे परिवार को राष्ट्र और धर्म से जोड़ सकती है। उन्होंने कहा कि हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य केवल इतना है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर हिंदुत्व का भाव जाग्रत हो।
 
उन्होंने उपस्थित जनसमूह से आह्वान किया कि वे यहां से जाते समय पंच परिवर्तन को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेकर जाएं, ताकि समाज और राष्ट्र दोनों सशक्त बन सकें।
 
समापन: आरती और प्रसादी के साथ संस्कार का संदेश
 
कार्यक्रम के अंत में भारत माता की संगीतमय आरती की गई, जिसमें हजारों लोगों ने सामूहिक रूप से सहभागिता की। इसके पश्चात सभी उपस्थितजनों को भोजन प्रसादी वितरित की गई। यह भव्य हिंदू सम्मेलन समाज में एकता, जागरण और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करता हुआ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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