लोकतांत्रिक बहुलता के बीच खड़ा एक सशक्त हिन्दू राष्ट्र भारत

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    01-Jan-2026
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Mohan Bhagwat Ji
 
आलोक बंधु श्रीवास्तव
भारत एक हिन्दू राष्ट्र है, आरएसएस प्रमुख माननीय मोहन भागवत जी का यह वक्तव्य हिन्दूत्व की वैचारिक घोषणा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के संविधान में दी गई धर्मनिरपेक्षता की व्यवस्था के बीच सुदृड़ता से खड़े हिन्दू राष्ट्र को परिभाषित करती है। जिसका अभिप्राय यह है कि भारत के संविधान में जो भी व्यवस्था है, उसमें हिन्दू राष्ट्र शब्द का समावेश हो या ना हो पर यह सत्य और अमिट है कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है।
 
हाल ही में 21 दिसम्बर को कोलकता में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 100 वर्ष की संघ यात्रा - नए क्षितिज व्याख्यान माला कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें व्याख्यान करते हुये संघ प्रमुख ने एक उदाहरण के माध्यम से व्यक्त किया कि सूरज पूरब से उगता है, हमें नहीं पता कि यह कब से हो रहा है, तो क्या इसके लिये हमें संविधान की स्वीकार्यता चाहिये। हिन्दुस्तान एक हिन्दू राष्ट्र है, जो भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है वह भारतीय संस्कृति का सम्मान करता है, जब तक हिन्दुस्तान की धरती पर एक भी ऐसा व्यक्ति है जो भारतीय पूर्वजों की गौरवशाली विरासत में विश्वास करता है और उसे संजोकर रखता है, तब तक भारत एक हिन्दु राष्ट्र है, यही संघ की विचारधारा है। इस व्याख्यान के जरिये स्पष्ट इंगित कर दिया गया कि संघ भारत के मूल धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के बारे में वास्तव में क्या विचार रखता है, संघ के लिये इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि संसद कभी संविधान में संशोधन कर वह हिन्दू राष्ट्र को जोड़ती है या नहीं हमें उस शब्द की परवाह नहीं क्योंकि हम हिन्दू हैं और हमारा राष्ट्र हिन्दू राष्ट्र है यही अटल सच्चाई है।
 
संविधान में अनच्छेद 14 संविधान की प्रस्तावना में दिये धर्मनिरपेक्ष शब्द को मजबूती देता है जिसमें समानता या कानून के समान संरक्षण की व्यवस्था है। इसके बावजूद भी यह सर्व स्वीकार होना चाहिये कि हिन्दू कोई नाम भर नहीं है, बल्कि एक विशेषता है, जो भी राष्ट्र की संस्कृति का सम्मान करता है, वह हिन्दू है, चाहे उनकी भाषा, रीति-रिवाज कुछ भी हो। भारत हिन्दू राष्ट्र तब तक बना रहेगा जब तक हमारी संस्कृति का सम्मान होगा।
 
 
हिन्दू संस्कृति के ओज को कम करने के लिये हमेशा से षडयंत्रकारी प्रयास होते रहे है, पाश्चात्य संस्कृति एक दीमक की तरह हिन्दू संस्कृति का क्षरण करने के लिये विस्तारित हो रही है। लिव-इन रिलेशनशिप जैसे दूषित आचरण समाज के लिये हानिकारक होकर हिन्दू संस्कृति की सामाजिक एवं पारिवारिक कुटुम्ब व्यवस्था के लिये घातक बनते जा रहे है। हिन्दू संस्कृति की मूल अवधारणा में परिवार और कुटुम्ब जैसे शब्द अब कही खों गये हों ऐसा जान पड़ता है ऐसे में लिव इन रिलेशनशिप जैसी कुप्रथा से हमें समाज को बचाना आवश्यक है। कुटुम्ब व्यवस्था को पुनःस्थापित करके उसके मूल्यों को बचाना एवं विस्तारित करना होगा।
 
 
संविधान में लोकतांत्रिक व्यवस्था की आड़ में हिन्दू संस्कृति से पृथक अन्य धर्म हिन्दू और हिन्दुत्व को आंख दिखा रहे है। ये भी किसी से छुपा नहीं है कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में चाहे देश के अन्दर या पड़ोसी देशों में जिस तरह हिन्दुओं को लक्ष्य बना कर प्रताड़ित किये जाने की घटनायें हुई हैं वे सब हिन्दू और हिन्दूत्व की रक्षार्थ संगठित होने की सीख देती हैं। क्योंकि संगठित हिन्दू ही, सशक्त हिन्दू राष्ट्र का आधार है।
 
संघ की हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा किसी धर्म विशेष के विरूद्ध नहीं है, संघ सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन है। संघ को समझना है तो संघ को ही देखना पड़ेगा। माननीय संघ प्रमुख के व्याख्यान की कुछ बाते बड़ी महत्वपूर्ण हैं जिसमें उन्होने कहा कि आप एक्सरसाइज कर रहे हैं तो इसका अभिप्राय यह नहीं है कि आप किसी पर आक्रमण करने की योजना बना रहे हैं, बस आप खुद को फिट रख रहे हैं, भारतीय समाज को तैयार करने के ध्येय से संघ स्थापित हुआ ताकि भारत एक बार फिर से विश्व गुरू बन सके। संघ की धमनियों में हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा इसलिये रची बसी है क्योंकि हिन्दू हमेशा इस देश के लिये खुद को जिम्मेदार मानता है। जो लोग गर्व से हिन्दू कहते है उन्हीं से हमेशा पूछा जायेगा कि आपने अपने देश के लिये क्या किया।
 
 
हिन्दुओं को समझना होगा, सत्य के साथ ताकत भी महत्वपूर्ण है, हमारी पूरी हिन्दू संस्कृति जो की सत्य पर आधारित है, पर सत्य को जिन्दा तभी रख पायेंगे जब हिन्दू हिन्दुत्व की रक्षार्थ संगठित हो कर जियेगा इसलिये हिन्दू राष्ट्र की अलख जलती रहनी होगी। वर्तमान परिस्थिति मे संगठित हिन्दू की आवश्यता उससे समर्थ भारत का निर्माण करने की दिशा में माननीय भागवत का व्याख्यान एक जाग्रत हिन्दू, सकल संगठित हिन्दू समाज, समर्थ भारत के निर्माण के लिये संकल्पित होकर हिन्दू धर्म, और राष्ट्र धर्म योद्धा बनने की हमें शक्ति देता है।