प्रज्ञा प्रवाह महिला आयाम, मध्यभारत प्रांत की मासिक बैठक में हुआ वैचारिक मंथन और द्रौपदी के चरित्र पर विशेष चर्चा

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    31-Jul-2025
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प्रज्ञा प्रवाह महिला आयाम, मध्यभारत प्रांत की मासिक बैठक 30 जुलाई 2025 को सायं 4 बजे भोपाल स्थित पुरुषार्थ भवन में संपन्न हुई। इस बैठक में वैचारिक विमर्श, ग्रंथ चर्चा एवं भारतीय परंपरा की पुनर्प्रतिष्ठा को लेकर महत्वपूर्ण संवाद हुआ। बैठक में प्रांत की वरिष्ठ कार्यकर्ताओं सहित कुल 18 सदस्यों की सहभागिता रही।
 
बैठक की शुरुआत आयाम की नियमित बैठकों के महत्व और दिशा पर चर्चा से हुई, जिसके उपरांत प्रख्यात विचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह प्रतिष्ठान के न्यासी, सदानंद सप्रे ने प्रख्यात लेखक रंगा हरि द्वारा रचित पुस्तक ‘व्यास महाभारत में द्रौपदी’ पर विमर्श प्रस्तुत किया।
 
संघ के उद्देश्य और वैचारिक स्पष्टता पर सदानंद सप्रे ने कहा कि वैचारिक स्पष्टता के लिए संघ की विचारधारा और उससे जुड़े विविध संगठनों की भूमिका को समझना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि संघ प्रेरित लगभग 35 संगठन विभिन्न क्षेत्रों शिक्षा, सामाजिक, वैचारिक, विज्ञान आदि में सक्रिय हैं, जिनका साझा उद्देश्य भारतीयता का सुदृढ़ीकरण है। प्रज्ञा प्रवाह और विज्ञान भारती जैसे संगठन वैचारिक क्षेत्र में विशेष योगदान दे रहे हैं।
 
भारतीय ज्ञान परंपरा पर चर्चा करते हुए उन्होंने ‘Pride of India’ पुस्तक का उल्लेख किया जिसमें भारतीय पुराणों में निहित विज्ञान संबंधी तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारे धर्मग्रंथों में पर्यावरण से संबंधित गहन चिंतन है, जिसकी तुलना सेमेटिक धर्मों के ग्रंथों में पर्यावरण चिंतन से करनी चाहिए। उन्होंने मातृभाषा और राजभाषा हिन्दी के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शासन भी अब भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा के प्रत्येक स्तर पर अनिवार्य कर रहा है।
  
साथ ही सप्रे जी ने सभी उपस्थितजनों से हिन्दी में विषय आधारित पुस्तक लेखन का आह्वान किया और कहा कि पंच परिवर्तन के सभी पांच विषयों पर कार्य कर वैचारिक स्पष्टता बढ़ाई जा सकती है।
 
डॉ. वंदना मिश्र ने ‘भारत’ पुस्तक पर चर्चा करते हुए बताया कि यह ग्रंथ औपनिवेशिक मानसिकता से ग्रस्त इतिहास लेखन के विरुद्ध वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि श्री रामेश्वर मिश्र पंकज और कुसुमलता केडिया द्वारा रचित यह पुस्तक भारत की आत्मा को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करती है।
 
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की डॉ. सरिता भदौरिया ने श्री रंगा हरि की पुस्तक ‘व्यास महाभारत में द्रौपदी’ की विस्तृत और गहन समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पुस्तक द्रौपदी के संदर्भ में प्रचलित भ्रांतियों का तथ्यात्मक खंडन करती है। विशेष रूप से उन्होंने उस लोकप्रिय किंवदंती को खारिज किया जिसमें कहा गया है कि द्रौपदी ने दुर्योधन को “अंधे का बेटा अंधा” कहा था। उन्होंने प्रमाण सहित बताया कि यह घटना मूल महाभारत में कहीं नहीं है और यह कल्पना 1953 में धर्मवीर भारती के नाटक ‘अंधा युग’ से उत्पन्न हुई, जिसे आगे चलकर बी.आर. चोपड़ा की टीवी श्रृंखला (1988) और अन्य कृतियों में दिखाया गया।
 
डॉ. भदौरिया ने द्रौपदी के आत्मसम्मान, बुद्धिमत्ता और साहस के कई उदाहरण प्रस्तुत किए, विशेषकर उस प्रसंग में जब द्रौपदी को सभा में लाया गया था। उन्होंने बताया कि कैसे द्रौपदी ने उस समय केवल अपने पति की नहीं, अपितु समस्त सभा की अंतरात्मा को झकझोरा और न्याय की पुनर्स्थापना के लिए भीष्म, विदुर और अंततः धृतराष्ट्र से प्रश्न किए। धृतराष्ट्र द्वारा वर मांगने पर द्रौपदी का उत्तर उनकी गरिमा का परिचायक था, जब उन्होंने अपने पतियों को दासत्व से मुक्त करने की इच्छा व्यक्त की और तीसरा वर न मांगने का निर्णय लेकर लोभ का त्याग किया।
 
पुस्तक में द्रौपदी के विभिन्न रूपों पांचाली, याज्ञसेनी, सैरंध्री, मालिनी आदि का उल्लेख करते हुए बताया गया कि किस प्रकार वह जीवन की अनेक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आत्मसम्मान की मशाल को बुझने नहीं देतीं। डॉ. भदौरिया ने कहा कि रंगा हरि जी का यह ग्रंथ द्रौपदी को केवल पांडवों की पत्नी नहीं, बल्कि धर्म की संरक्षिका, नारी अस्मिता की प्रतिनिधि और भारतीय स्त्री शक्ति के प्रतीक रूप में प्रस्तुत करता है।
 
बैठक में डॉ. वंदना मिश्रा, डॉ. श्रद्धा गुप्ता, डॉ. मीनू पांडे, श्रीमती प्रतिभा राजगोपाल, श्रीमती सरोज लता सोनी, श्रीमती साधना दुबे, प्रो. नीलिमा रंजन, श्रीमती कोकिला चतुर्वेदी, श्री भूपेंद्र सिंह सहित कुल 18 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही।
 
धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन किया गया।