भारत में सनातन हिंदू धर्म के अनुसार नव वर्ष को नवसंवत्सर कहा जाता है एवं यह देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। भारत में हिंदू धर्मावलम्बियों के लिए नव वर्ष का प्रथम दिन बहुत शुभ माना जाता है एवं प्राचीन भारत में इसे बहुत बड़े उत्सव के रूप में मनाया जाता रहा है।
उत्तर भारत में हिंदू नव वर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस वर्ष 22 मार्च 2023 को वर्ष प्रतिपदा तिथि पड़ रही है।
महाराष्ट्र में नव वर्ष को गुड़ी पड़वा के नाम से जाना जाता है।
सिंधी समुदाय नव वर्ष को चेटी चांद के नाम से मनाते हैं।
पंजाब में नव वर्ष को बैसाखी के नाम से मनाया जाता है।
जबकि सिख नानकशाही कैलंडर के अनुसार 14 मार्च होला मोहल्ला को नया साल माना जाता है।
गोवा में हिंदू समुदाय नव वर्ष को कोंकणी के नाम से मनाते है।
आंध्रप्रदेश, तेलंगाना राज्य में नव वर्ष को युगदि या उगादी के नाम से मनाते है।
कश्मीर में कश्मीरी पंडित नव वर्ष को नवरेह या नौरोज या नवयूरोज अर्थात् नया शुभ प्रभात के नाम से मनाते है।
बंगाल में नव वर्ष को नबा बरसा के नाम से, असम में बिहू के नाम से, केरल में विशु के नाम से, तमिलनाडु में पुतुहांडु के नाम से नव वर्ष मनाया जाता है।
मारवाड़ी में नव वर्ष दिवाली के दिन मनाते है।
गुजरात में दिवाली के दूसरे दिन नव वर्ष होता है।
बंगाली नया साल पोहेला बैसाखी 14 या 15 अप्रैल को मनाते हैं।
भारत में चूंकि कई समुदाय निवास करते हैं अतः नव वर्ष के नाम भी अलग अलग पाए जाते हैं एवं नव वर्ष को मनाने की परम्परा भी भिन्न-भिन्न है।