धूनी वाले दादाजी के दरबार में पहुंचें श्रद्धालु, स्वागत को आगे आये शहर वासी

बजरंग दल ने प्रारंभ किया था इस प्रिसिद्ध स्थान पर भंडारा, आज सैकड़ों भंडारे होते हैं

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    12-Jul-2022
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धूनी वाले बाबाजी दरबार
 
खंडवा। लोगों में गुरुपूर्णिमा का उत्साह जमकर देखा जा रहा है, लोग बड़े ही उत्साह के साथ गुरु स्थलों पर माथा टेकने को पहुँच रहे हैं. प्रांत में अनेक स्थल हैं जहाँ गुरुओं की महिमा का बखान दूर दूर होता है. इस श्रेणी में खंडवा के धूनी वाले बाबा का नाम भी बेहद प्रसिद्ध है. जहाँ बड़ी संख्या में लोग दर्शनों को पहुँचते हैं. गुरु पूर्णिमा से एक दिवस पूर्व उनके दरबार में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
 
बारिश के बावजूद, शहर के साथ साथ महाराष्ट्र के अलग अलग क्षेत्रों से आये श्रद्धालु भीगते हुए निशान यात्रा के साथ दादाजी दरबार में पहुंचे। भज लो दादाजी का नाम भज लो हरिहर जी का नाम के जयकारे लगाते हुए मुख्य मार्गों से गुजरते श्रद्धालुओं के जत्थों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने समाधि दर्शन कर लिए थे। इधर दूर दूर से आ रहे श्रद्धालुओं की सेवा के लिए पूरा शहर जुट गया है।
 
शहर के सीमा क्षेत्रों से लेकर दरबार तक जगह-जगह भंडारे किये जा रहे हैं। जिसमें पोहा, जलेबी, सब्जी पूड़ी, कड़ी खिचड़ी, चाय सहित तरह तरह के पकवान श्रद्धालुओं को नि:शुल्क परोसे जा रहे हैं। यहाँ के लोगों ने बताया कि दो दिनों तक 200 से अधिक स्थानों पर भण्डारों का आयोजन दो दिन तक चलेगा। इधर श्री दादाजी दरबार परिसर में भी भक्तों को भोजन प्रसादी का वितरण किया जा रहा है। वहीं श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए 22 धर्मशालाओं में फ्री व्यवस्था की गयी है। बाहर से आने वालों के लिए ऑटो फ्री रहेंगे।
 
बजरंग दल ने प्रारंभ किया था भंडारा, अब जगह-जगह होने लगे भंडारे
 
धूनी वाले दादाजी के यहाँ अनेक स्थानों पर भंडारे लगाये जायेंगे लेकिन इनकी शुरुआत बजरंग दल ने की थी। दादाजी भक्त व गणेश गोशाला के सचिव रामचंद्र मौर्य ने बताया कि 1992 में जिले के 2300 कार्यकर्ता उज्जैन कुंभ मेले में गए थे। तब वहां श्रद्धालुओं को चाय, पोहे व प्रसादी भंडारे में दी जा रही थी। यहीं से प्रेरणा लेकर बजरंग दल ने पहला भंडारा दादाजी मंदिर के पास शुरू किया था। इसके पहले दर्शनार्थी को प्रसाद नहीं मिल पाता था। वे अपनी ट्रैक्टर ट्राली के नीचे ही चूल्हा जलाकर भोजन की व्यवस्था करते थे।
 
 
धूनी वाले बाबाजी दरबार