गुना जिले के ग्राम मावन के कृषक श्री राम जी कुशवाह रसायन मुक्त खेती कर रहे हैं। इससे वह फल-फूलों को लगा रहे हैं और उनसे लाभ अर्जित कर रहे हैं। श्री राम कुशवाह जी अपने घर के बाड़ें में केंचुआ खाद्य आदि का उपयोग करके पौधों को गैर रासायनिक माध्यम से बड़ा कर रहे हैं। वह अपने खेत पर भी जैविक खाद्य से पेड़ उगाने के साथ खेती करते हैं। इसके साथ ही जैविक खाद्य आदि का विक्रय भी वे करते हैं, इससे भी उन्हें आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। उनकी इस पहल से नागरिक स्वस्थ बने रहेंगे।
ज्ञातव्य हो कि रसायनों के प्रयोग से मिट्टी होती है जहरीली हो जाती है, खतरनाक रसायनों के कारण खेती की जमीन सूखती गई और लगातार प्रयोग से मिट्टी जल जाती है। रसायनों के प्रभाव से सब्जियां और अनाज भी जहरीले होने का ख़तरा रहता है। इससे मानव जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। रसायनों के उपयोग से 100 वर्षों तक इसका प्रभाव जमीन पर देखने को मिलता है. वर्तमान में इसके अत्यधिक उपयोग से मानवों के सामने कई बीमारियाँ चुनौती देकर खडी हो रही हैं। ऐसे समय में रसायन मुक्त खेती की अत्यधिक आवश्यकता है, जिससे की नागरिकों को होने वाली बीमारिओं से बचाया जा सके।
कचरा, गोबर तथा फसल अवशेषों से तैयार होने वाली खाद के उपयोग से पर्यावरण प्रदूषित नहीं होता हैं। इसके प्रयोग से सिंचाई की लागत में कमी आती हैं। राम जी द्वारा कि जा रही रसायन मुक्त खेती से अन्य सुखद परिवर्तन मानव जीवन में आयेंगे। इसलिये खेती में छोटे छोटे प्रयास करके रसायन मुक्त खेती की और किसानों को बढना चाहिए।
केंचुआ खाद्य से करते हैं खेती, मिलेगा सहयोग
मावन ग्राम के राम जी कुशवाह जी द्वारा केंचुआ खाद्य के निर्माण और उसके उपयोग से न सिर्फ अपने वर्तमान को सुखद बनाने के लिए कार्य कर रहे। इसके साथ ही वे पीढ़ियों के सुखद भविष्य के लिए भी लगातार सहयोगी के रूप में खड़े हुए है, जिसके माध्यम से सभी के लिए रसायन मुक्त खाद्य पदार्थ मिल पाएंगे.
केंचुआ खाद से होते हैं यह लाभ
- यह भूमि की उर्वरकता, वातायनता को तो बढ़ाता ही हैं, साथ ही भूमि की जल सोखने की क्षमता में भी वृद्धि करता हैं।
- वर्मी कम्पोस्ट वाली भूमि में खरपतवार कम उगते हैं तथा पौधों में रोग कम लगते हैं।
- पौधों तथा भूमि के बीच आयनों के आदान प्रदान में वृद्धि होती हैं।
- वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने वाले खेतों में अलग अलग फसलों के उत्पादन में 25-300% तक की वृद्धि हो सकती हैं।
- मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती हैं।
- वर्मी कम्पोस्ट युक्त मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश का अनुपात 5:8:11 होता हैं अतः फसलों को पर्याप्त पोषक तत्व सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं।
- केचुओं के मल में पेरीट्रापिक झिल्ली होती हैं, जो जमीन से धूल कणों को चिपकाकर जमीन का वाष्पीकरण होने से रोकती हैं।
- केचुओं के शरीर का 85% भाग पानी से बना होता हैं इसलिए सूखे की स्थिति में भी ये अपने शरीर के पानी के कम होने के बावजूद जीवित रह सकते हैं तथा मरने के बाद भूमि को नाइट्रोजन प्रदान करते हैं।
- वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि करता हैं तथा भूमि में जैविक क्रियाओं को निरंतरता प्रदान करता हैं।
- इसका प्रयोग करने से भूमि उपजाऊ एवं भुरभुरी बनती हैं।
- यह खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं।
- इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं।
- मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं।
- लगातार रासायनिक खादों के प्रयोग से कम होती जा रही मिट्टी की उर्वरकता को इसके उपयोग से बढ़ाया जा सकता हैं।
- इसके प्रयोग से फल, सब्जी, अनाज की गुणवत्ता में सुधार आता हैं, जिससे किसान को उपज का बेहतर मूल्य मिलता हैं।
- केंचुए में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव मिट्टी का pH संतुलित करते हैं।
- उपभोक्ताओं को पौष्टिक भोजन की प्राप्ति होती हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में इसके उपयोग से रोजगार की संभावनाएं उपलब्ध हो जाती हैं।
- यह बहुत कम समय में तैयार हो जाता हैं।
- केंचुए नीचे की मिट्टी को ऊपर लाकर उसे उत्तम प्रकार की बनाते हैं।