मकर संक्रांति पर विलीनीकरण आंदोलन का है विशेष महत्त्व

नबाबी कार्यालयों पर तिरंगा फहराने एवं वंदे मातरम्‌ गान करने पर होती थी गिरफ्तारी व लाठी चार्ज

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    14-Jan-2022
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भोपाल
 
मकर संक्रांति पर मध्यप्रदेश के बोरास में लगने वाला मेला विशेष महत्त्व रखता है. यह मेला शहीदों के नाम से जाना जाता है। बोरास में लगने वाला यह मेला भोपाल के विलीनीकरण आंदोलन की वजह से अपनी एक अलग पहचान लिए है। इसी दिन भोपाल नबाव के विरूद्घ चलाए जा रहे विलीनीकरण आंदोलन में चार नौजवानों ने अपने आप को बलिदान कर दिया था. तब कहीं जाकर भोपाल रियासत आजाद भारत का हिस्सा बनी।
 
भारत सन्‌ 1947 को स्वाधीन हो गया था। किन्तु मध्यप्रदेश के 2 जिले रायसेन एवं सीहोर भोपाल नवाब हमीदुल्ला के गुलाम थे। इसी गुलामी को समाप्त करने हेतु तत्कालीन रियासत भोपाल के नागरिकों ने जो आंदोलन चलाया था उसे इतिहास में भोपाल विलीनीकरण आंदोलन के नाम से जाना जाता है।
 
भोपाल स्टेट में यह आंदोलन जनक्रांति का रूप धारण कर उग्र हो गया। नबाबी कार्यालयों पर तिरंगा फहराना एवं वंदे मातरम्‌ गान पर गिरफ्तारी, लाठी चार्ज किया जाता था। इसी क्रम में 14 जनवरी 1949 को मकर संक्रांति मेले में क्षेत्र के नवयुवकों का उत्साह चरम पर था। नर्मदा किनारे बोरास घाट पर मेला भरा हुआ था कि बीच मेले में भोपाल नवाव के खिलाफ विलीनीकरण आंदोलन के नवयुवकों द्वारा झंडा वंदन एवं सभा का आयोजन किया गया। झंडा वंदन होने के बाद स्व. बैजनाथ गुप्ता बिजली बाबा ने झंडा वंदन गीत गाया।
 
जाफर अली ने सभास्थल पहुंचकर झंडा उतारने एवं सभा बंद करने चेतावनी दी। जिसकी परवाह न करते हुए 16 वर्ष का नवयुवक छोटेलाल आगे आया और बोला गोली का क्या डर बताता है तभी थानेदार ने गोली चलाने का आदेश दे दिया। एक गोली आकर छोटेलाल शहीद हो गया।
 
तब झंडा सुल्तानगंज निवासी 25 वर्षीय वीर धनसिंह राजपूत ने थाम लिया, किन्तु अगली गोली धनसिंह के सीने में समा गई। इसी क्रम में तीसरे शहीद हुए 30 वर्षीय मंगल सिंह, 3 नवयुवकों के शहीद होने के बाबजूद झंडे नीचे नहीं गिरे। चौथे नवयुवक ग्राम भुआरा निवासी विशाल सिंह ने थाम लिया परन्तु गोली चलना जारी था। परिणामस्वरूप विशाल सिंह के सीने में 2 गोलियां लगी परन्तु उसने भी झंडा नहीं छोड़ा। पुलिस क्रूरता पर उतर आई संगीन उसके पेट में उमेठ दी गई किन्तु विशाल सिंह ने झंडा झुकने नहीं दिया इसे वह नर्मदा के जल तक ले गया और गड़ा दिया और हर नर्मदे कह कर अंतिम सांस ली। इस तरह यह गोलीकांड भोपाल नवाव शाही के पतन का कारण बनी।