एक परिचय - विश्व संवाद केंद्र

01 Jul 2021 17:12:00


विश्व मंगलकारी भारतीय चिंतन तथा श्रेष्ठ हिन्दू संस्कृति के शाश्वत जीवन मूल्यों को देश तथा विश्व में प्रतिस्थापित करने के उद्देश्य से विश्व संवाद केंद्र देश भर में विभिन्न संस्थाओं, प्रचार माध्यमों तथा जनमत निर्माता प्रबुद्धजनों के बीच संवाद स्थापित करने हेतु एक मंच के रूप में कार्य करता है। अपनी देशव्यापी श्रृंखला के माध्यम से इसका कार्य सुचारू रूप से चल रहा है।

श्री रामजन्मभूमि आन्दोलन के कालखंड में हिंदुत्व जागरण संबंधी समाचारों को उचित रूप में प्रस्तुत करने के लिए नारद जयन्ती संवत 2049 तदनुसार मई 1992 में प्रथम विश्व संवाद केंद्र लखनऊ में प्रारंभ हुआ। उसके बाद कानपुर, आगरा, गोरखपुर, काशी, देहरादून, दिल्ली आदि नगरों के साथ दक्षिण बिहार, बंगाल, असम, महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, कर्णाटक, आंध्र, उत्कल, गुजरात, विदर्भ, महाकौशल, पंजाब, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर व नेपाल आदि राज्यों में भी स्वतंत्र एवं स्वावलंबी केंद्र स्थापित हुए।

विश्व संवाद केंद्र भोपाल, इस श्रृंखला की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसकी स्थापना व विधिवत पंजीयन 13 फरवरी, 1999 को भोपाल में संपन्न हुआ।

हमारी धारणा

वर्तमान समय सूचना क्रान्ति का है। सूचना व जानकारी व्यक्तित्व निर्माण से लेकर राष्ट्र निर्माण तक की प्रक्रिया का अंग हैं। एक तरफ जहां व्यक्तित्व निर्माण के लिए नाना प्रकार की सूचनाएं आवश्यक हैं और दूसरी तरफ परकीयों द्वारा हो रहे सांस्कृतिक प्रदूषण का खतरा भी कम नहीं है। विश्व मानवता के अद्यतन विकास का नेतृत्व करने का गुरुतर दायित्व युगों से भारत के मनीषियों ने निर्वहन किया है।

सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयःके संकल्प को साकार करने के लिए भारतीय समाज को सूचना प्रतिस्पर्धा की चुनौती स्वीकार करनी ही होगी।

हमारा कार्य

- भौगौलिक रूप से कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश है तथा सघन कार्य भोपाल में है।

- भारतीय चिंतन परंपरा और अवधारणाओं पर समुचित संवाद व समय-समय पर तद्विषयक साहित्य का प्रकाशन।

- विभिन्न सामाजिक संस्थाओं व संगठनों द्वारा किये जा रहे समाजोपयोगी व कल्याणकारी सेवा कार्यों की जानकारी मीडिया के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने हेतु विविध स्तरों पर प्रयास।

- भारतीय अवधारणाओं के पक्ष-विपक्ष की जानकारियों का संकलन, अध्ययन, संवाद व समीक्षा।

- विभिन्न विषयों पर गोष्ठी, सेमिनार एवं विमर्श आदि का आयोजन।

- उपरोक्त गतिविधियों को प्रभावी रूप देने के लिए साप्ताहिक फीचर सेवा संवाद-मंथन-मेल द्वारा छोटे व मंझोले समाचार पत्रों व राष्ट्रवादी विचारकों तक पहुँचाने की व्यवस्था।

- सन्दर्भ ग्रंथालय व ई-लाब्रेरी की स्थापना।

- नवोदित पत्रकारों को समुचित प्रोत्साहन व उनमें राष्ट्रवादी चेतना जागृति हेतु प्रयास।

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