अद्भूत है ये मुक्तिधाम, पिकनिक मनाने आते हैं लोग – इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दर्ज

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    02-Jun-2021
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मुरैना - बीते दिनों मुक्तिधाम की तस्वीरें टीवी और समाचारपत्रों में खूब दिखाई गयीं, जलते शव किसे आचे लगते हैं. जब किसी मुक्तिधाम की बात की जाती है तो लोगों के मन में भय और उदासी जैसे भाव आ जाते हैं, लेकिन आज हम जिस मुक्तिधाम के बारे में आपको बता रहे है उसकी कहानी कुछ अलग है. यह मुक्तिधाम अब केवल मुक्तिधाम नहीं रह गया बल्कि अब लोग यहां पिकनिक मनाने और अपने मन को सुकून देने पहुंचते हैं.

इस मुक्तिधाम में पर्यावरण प्रेम की भी अनूठी झलक दिखाई देती है और यह मुक्तिधाम प्रकृति संरक्षण का अनूठा उदाहरण है. आज हम बात कर रहे हैं पोरसा के मुक्तिधाम की जिसका नाम हाल ही में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है.

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से एक प्रमाण पत्र भी मुक्तिधाम की व्यवस्था देखने वाले डॉक्टर अनिल गुप्ता को भेजा गया है. पोरसा क्षेत्र के मुक्तिधाम की व्यवस्था वहां का वातावरण चित्रकारी और साफ सफाई के कारण मुक्तिधाम मुक्तिधाम नहीं बचा बल्कि एक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित हो गया. इसी कारण से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में मुक्तिधाम का नाम दर्ज होने की घोषणा पिछले दिनों की गई थी. डॉक्टर अनिल गुप्ता के मुताबिक मुक्तिधाम के संचालन में उनकी पत्नी लक्ष्मी गुप्ता और पुत्री भी पूरा सहयोग देती है. गुप्ता के मुताबिक वह हर दिन लगभग 4 से 6 घंटे मुक्तिधाम में सेवा कार्य करते हैं. इसके अलावा पोरसा शहर के नागरिक भी पूरे काम में उनका सहयोग करते हैं, सभी के सहयोग के कारण मुक्तिधाम सिर्फ शवों की अंत्येष्टि तक ही सीमित नहीं है बल्कि अब मुक्तिधाम में लोग अपनी दैनिक गतिविधि पर इतने और मनोरंजन के लिए भी आने लगे हैं .

गंदगी देख लिया मुक्ति धाम को सवारने का संकल्प

डॉ गुप्ता बताते हैं कि लगभग 1995 के समय में वह अपने एक परिचित के अंतिम संस्कार में सम्मिलित होने गए थे, तब उन्होंने देखा कि पोरसा का मुक्तिधाम पूरी तरीके से अस्त-व्यस्त है. श्मशान घाट में चारों तरफ गंदगी का आलम है. उन्होंने उसी वक्त संकल्प लिया कि जब तक इस मुक्तिधाम की तस्वीर नहीं सवार देते तब तक वह सुकून से नहीं बैठेंगे. इसके बाद से ही वह और उनका पूरा परिवार मुक्तिधाम की दिशा और दशा सवारने में लग गए जिसका परिणाम यह हुआ कि आज मुक्तिधाम में गार्डन फिसल पट्टी झूला व औषधीय पौधे लगे हुए हैं और लोग अब मुक्तिधाम में अपने मन को शांति देने के लिए पहुंचने लगे हैं.

 

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लावारिस लाशों का किया जाता है सम्मान जनक अंतिम संस्कार

पोरसा के मुक्ति धाम में लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार भी सम्मान जनक तरीके से किया जाता है. इसकी जिम्मेदारी भी मुक्तिधाम को संचालित करने वाली समिति ने अपने कंधों पर उठा कर रखी है कि आस पास के क्षेत्र में कोई लवारिस लाश मिलती है तो उसका अंतिम क्रिया कर्म भी पूरे रीतिरिवाजों के साथ सम्मान जनक तरीक़े से किया जाएगा .

मुक्ति धाम होते हैं संस्कृतिक कार्यक्रम

मुक्तिधाम में अब प्रत्येक 4 वर्ष में दीपदान का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है और इसके साथ ही लोगों में से मुक्तिधाम का भाई निकालने हेतु लगातार कार्य किए जाते हैं. मुक्तिधाम समिति के द्वारा प्रत्येक वर्ष है श्मशान घाट में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है . जब इन सब क्रियाकलापों के बारे में जानकारी इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड के सदस्यों को लगी तो उन्होंने तुरंत ही अनिल गुप्ता से संपर्क करके उनके कार्यों की सराहना की, इसके बाद अब आज पोरसा जैसे छोटे से क्षेत्र का यह मुक्तिधाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुका है .