कोरोना काल में - देवदूत भारत

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    07-Apr-2021
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  डॉ. राहुल जैन   

 
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 प्रत्येक वर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है. आज जब दुनिया कोरोनावायरस के प्रभाव से त्रस्त है ऐसे में इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है. 7 अप्रैल को ही साल 1948 में विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ की स्थापना हुई थी यह संयुक्त राष्ट्र का ही हिस्सा है. इसका प्रमुख उद्देश्य विश्व में स्वास्थ्य समस्याओं पर नए रखना है और लोगों के स्वास्थ्य स्तर को ऊपर उठाना है.इस साल विश्व स्वास्थ्य दिवस 2021 का विषय "एक निष्पक्ष ,स्वस्थ दुनिया का निर्माण" है. जो कि वर्तमान संदर्भ में अनुकूल है.

वैश्विक संकट कोरोनावायरस के समय दुनिया भर के देशों के लिए भारत एक देवदूत की भूमिका निभा रहा है.जिसकी सेवा भावना, सामर्थ्य एवं अभूतपूर्व सहयोग की भूरी भरी प्रशंसा एवं ह्रदय स्पर्शी धन्यवाद संदेश प्राप्त हो रहे हैं .

कुछ समय पहले ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैक्सीन के तौर पर भारत की खुले दिल से तारीफ की थी. उन्होंने दूसरे देशों को वैक्सीन आपूर्ति हेतु भारत की पीठ भी थपथपाई थी. अमेरिका ने भी भारत को सच्चा दोस्त बताते हुए कहा था कि वह अपने फार्मा सेक्टर का इस्तेमाल दुनिया भर के लोगों की सहायता के लिए कर रहा है. भारत में जहां-जहां वैक्सीन भेजी है उन देशों ने भी दिल से धन्यवाद दिया है

हाल ही में ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो ने Covid-19 वैक्सीन के निर्यात के लिए भारत को एक अलग ही अंदाज में धन्यवाद दिया है. उन्होंने एक तस्वीर ट्वीट की जिसमें हनुमान जी को वैक्सीन ले जाते हुए दिखाया गया है .यह ट्वीट हिंदू महाकाव्य रामायण के संदर्भ का था, जिसमें लक्ष्मण के प्राणों को बचाने के लिए हनुमान जी संजीवनी बूटी के लिए पूरा पर्वत उठा ले आए थे.ये भारत की धार्मिक एवं संस्कारिक परं परा को वैश्विक मान्यता है ,जो कि कूट नीति के स्तर पर असाधारण है .

भारत की वैक्सीन सहायता दुनिया के उन तमाम छोटे-बड़े देशों को बिना किसी भेदभाव के समान रूप से पहुंच रही है जिन देशों में इतना सामर्थ भी नहीं है कि वह विदेशों से निर्मित वैक्सिंग खरीद सके.

कोविड वैक्सीन विकसित होने के बावजूद दुनिया के कुछ देशों के सामने एक विकट समस्या है. उनके यहां ना ही वैक्सीन बन पा रही है और ना ही इतना बजट है कि वह अपने नागरिकों के लिए वैक्सीन खरीद सके ऐसे देशों के लिए भारत किसी देवदूत की तरह सामने आया है.

ऐसे कई निम्न आर्थिक देशों को भारत ने अपने यहां बनी ऑक्सफोर्ड एस्ट्रोजैनेका वैक्सीन कोविशील्ड की खेप तोहफे के रूप में भिजवाई है.एक तरफ जहां देश में टीकाकरण का अभियान बदस्तूर जारी है वहीं दूसरी तरफ इन देशों को सहायता भी.भारत की इस पहल को दुनिया भी सराह रही है.

कोरोना संकट की शुरुआत से पहले मास्क, पीपीई किट और अन्य स्वास्थ्य से संबंधित वस्तुओं के उत्पादन एवं उपलब्धता में भारत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन इसी संकट के दौरान भारत ने इन वस्तुओं के उत्पादन में महारत हासिल कर दुनिया को अपनी क्षमताओं से अवगत भी कराया है.

भारत स्वयं को सुरक्षित रखने के प्रयासों के साथ ही अपने पड़ोसी देशों से लेकर दूर छोटे देशों में भी वैक्सीन पहुंचाकर परहित सुखाय कि अपनी संस्कृति को बखूबी निभा निभा रहा है.कोविड-19 महामारी से एक वर्ष से अधिक समय पीड़ित दुनिया के लिए भारत एक देवदूत की तरह सामने आया है.

भारत ने जनवरी में वैक्सिंग मैत्री की शुरुआत की थी जिसके बाद भारतीय वैक्सीन की पहली खेप मालदीव, भूटान,भूटान और उसके बाद पड़ोस के अन्य देशों में भेजी गई .भारत ने जिन देशों को कोरोना वैक्‍सीन की खुराक उपलब्ध क़रवाई हैं वो या तो भारत की प्राथमिकता का हिस्सा थे या फिर उन्‍होंने भारत से इसके लिए अपील की थी.

भारत इस महामारी पर न सिर्फ अपने यहां नियंत्रण रखने का सफल प्रयास कर रहा है बल्कि दुनिया को इस संकट से उबारने में एक सक्रिय भूमिका निभा रहा है.ये भूमिका भारत दो तरह से अदा कर रहा है.पहला भारत की बनाई वैक्‍सीन को दूसरे देशों को भेजना तो दूसरा विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवैक्‍स योजना में सक्रिय सहयोग करना.

विदेश सचिव श्री हर्ष सिंगला के अनुसार वैक्सिंग मैत्री लॉन्च के बाद से भारत ने 82 देशों को लगभग 64 मिलियन खुराक की आपूर्ति की है I विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश होने के बावजूद एवं सीमित संसाधनों के साथ भारत ने बेहतर कोविड-19 प्रबंधन कर एक नजीर प्रस्तुत की है.

वर्तमान भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनियाभर को निस्वार्थ भावना से वैक्‍सीन उपलब्‍ध कराई जाए. देश के लोगों की जरूरत पूरी करने के बाद भारत ने अपने पड़ोसियों और सहयोगियों को पहली प्राथमिकता दी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यही कहना है कि भारत अपनी वैक्सीन व्यवस्था का इस्तेमाल दूसरे देशों की सहायता में करेगा.भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस संबंध में पूरी दुनिया की सहायता करने की पुष्टि की है.हालाकि,पाकिस्तान की तरफ से भारतीय वैक्‍सीन को हासिल करने की कोई आधिकारिक पहल नहीं की गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोवैक्स को 145 देशों को भेजने की घोषणा की है इनमें से अधिकतर वह देश हैं जो आर्थिक रूप से गरीब हैं और जो वैक्सीन का खर्च उठाने में असमर्थ हैं. इनमें पाकिस्तान भी शामिल है.

वैक्सीन भेजने के मामले में ही नहीं बल्कि भारत अपने यहां पर किए जा रहा है वैक्सीनेशन के मामले में भी कई देशों से काफी आगे है और भारत में अभी तक 6 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीनेशन का लाभ दिया जा चुका है.

भारत की वैक्सीन मैत्री रूपी कूटनीति अब एक नई ऊंचाई पर जाने वाली है अभी पिछले दिनों ही वार्ड की बैठक में यह तय किया गया कि भारत को कोरोनावायरस इन के उत्पादन के क्षेत्र में सहायता की जाएगी इसके अंतर्गत वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाया जाएगा वैसे भारत पैक्सी निर्माण क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश है.

भारत के पास इसके उत्पादन की पूरी क्षमता और तकनीक है भारत में वैक्सीन के आने से पहले ही खुद को साबित किया है विदेश मामलों के जानकार प्रोफेसर हर्ष बी पंत मानते हैं कि इन प्रयासों से भारत की छवि काफी बेहतर हुई है.

इस भयंकर महामारी की वजह से भारत की महत्ता दुनिया अच्छी तरह से परिचित हो गई है वैक्सीन कूटनीति में भारत ने अपना दायरा काफी बड़ा लिया है साथ ही अपनी वसुधेव कुटुंबकम् की संस्कृति पर अमल करते हुए भारत निरंतर विभिन्न देशों को कोरोनावायरस इन बेचकर उन्हें भयंकर वायरस से बचाने में सहायता कर रहा है.अपनी इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए भारत में दिल्ली में तैनात सभी विदेशी राजनयिकों के लिए निशुल्क कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने जा रहा है जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार उन्हें दवा निर्माण में भारत की मौजूदा रिसर्च और विकास सुविधाओं , विनिर्माण क्षमता विदेशी सहयोग आदि के बारे में विस्तार से अवगत कराया गया . भारत की इस अद्भुत क्षमता से विदेशी राजनयिक भी विस्मित है.उन्हें यह भी बताया गया कि दवाओं से जुड़े मामलों में भारत मानवता के लिहाज से सभी देशों की सहायता करने का इच्छुक है. इससे पहले नवंबर में भी विदेश सचिव श्री हर्ष श्रंग्ला ने कॉरोना संकट से निपटने की कार्ययोजना पर 190 देशों के विदेशी दूतो को जानकारी प्रदान की थी.

कोरोना वायरस से उपजी बीमारी कोविड-19 से दुनिया का शायद ही कोई कोना बचा हो, वैश्विक महामारी के कारण वैश्विक ढांचे और परिदृश्य में परिवर्तन अवश्ययंभी है.कोविड-19 से पहले अंतरराष्ट्रीय जगत में चीन के वर्चस्व में निरंतर बढ़ोतरी हो रही थी किंतु कोरोना आपदाने चीन की कलई खोल कर रख दी है.चीन ने अपनी दादागिरी से रही- सही शेष कसर भी पूरी कर दी.संदिग्ध चीन कारोना संक्रमण की व्यापक जांच को लेकर आरंभ से ही बरगलाता रहा है और जब उस पर इसके लिए दवा पढ़ा तो उसने इसकी मुखरता से मांग कर रहे ऑस्ट्रेलिया ,जापान आदि देशों को घुड़की देने से भी परहेज नहीं किया.

कोरोना पूर्व काल में वैश्विक महाशक्ति बनने की आकांक्षा कोरोना काल में उसके गैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार से जरूर आहत हुई है.

सीमा पर भारत के लिए चुनौती चीन और पाकिस्तान जैसे देशों का भारत के प्रति कुछ नरम रवैया होने के पीछे इन पहलुओं का भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है. नित्य बदलते वैश्विक समीकरण से इन देशों को आशंका सता रही थी कि यदि उसने भारत के साथ शत्रुता बढ़ाई तो विश्व भारत के पक्ष में एकमुश्त लामबंद हो सकता है.भविष्य में वैश्विक ढांचे के अंतर्गत भू-राजनीतिक, भू-आर्थिक और भू-सामरिक मोर्चों पर भारत का वर्चस्व एवं भूमिका बढ़ना निश्चित ही संभव है.

पुनशच -

वैश्विक संकट के दौरान भारत ने स्वास्थ्य मंत्री उत्पादों एवं सेवाओं के अग्रणी आपूर्ति वाहक के रूप में एक विश्वसनीय पहचान स्थापित की है .आज सारी दुनिया भारत की वैक्सीन मैत्री की कायल है. कॉरॉना संकटकाल में वैश्विक परिदृश्य पर भारत का ऐसे अभूतपूर्व उदय का श्रेय निस्संदेह देश के परिपक्व राजनीतिक नेतृत्व को जाता है.जिसने भारत की क्षमता सीमित संसाधनों में भी सिद्ध हुई और वह भी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ .

भारत के इन्हीं समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि विश्व में उसके प्रति सम्मान बढ़ा है,यह कहना सर्वथा उचित होगा कि कोरोनावायरस के विरुद्ध लड़ाई में भारत भारत में विश्व बंधुत्व की भावना को साकार किया है.

तुलसी दास जी कृत श्री रामचरितमानस की पंक्तियों. - ‘परहित सरिस धर्म नहीं भाई’ अर्थात दूसरों की भलाई के समान अन्य कोई श्रेष्ठ धर्म नहीं है ,को सही मायनों में हमारे देश ने वैक्सीन मैत्री के द्वारा चरितार्थ किया है . संकट काल में देश का बढ़ता हुआ कद हर भारतवासी के गौरव का विषय है