राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है राम मंदिर: श्री विजय दीक्षित

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    01-Feb-2021
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मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति न्यास द्वारा  स्तंभ व पत्रलेखन प्रतियोगिता आयोजित ,व्याप्ति उमड़ेकर व ज्योति बोहरे रहीं प्रथम कई अन्य प्रतिभागियों ने भी जीते पुरस्कार

 

ग्वालियर। राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है श्रीराम मंदिर। जन्मभूमि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का आंदोलन राष्ट्रीय एकता का आंदोलन था। उक्त उद्गार मध्य भारत प्रांत के सह प्रान्त प्रचार प्रमुख विजय दीक्षित ने व्यक्त किए। अवसर था मामा माणिकचंद स्मृति न्यास के तत्वावधान में आयोजित पत्र व स्तंभ लेखक सम्मान समारोह का।

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्री दीक्षित ने कहा कि मामाजी की कलम को सभी जानते हैं, उन्होंने हमेशा कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने का काम किया। मामाजी ने स्वदेश को शोध शाला के रूप में सिंचित किया। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को लेकर उन्होंने कहा कि वर्ष १५२८ में बाबर ने मंदिर को विध्वंस किया था। इसके अलावा और भी कई आक्रांताओं ने भारत को लूटा और हमारी संस्कृति को नष्ट किया। इन सबके बाद भी आजादी के पहले से ही राम मंदिर निर्माण के प्रयास शुरू हो गए थे। दीक्षित ने कहा कि सर्व समाज की आस्था का केंद्र है श्रीराम मंदिर, यहां जैन व बौद्ध समाज का भी स्थान है। सभी धर्मो का संगम अयोध्या में देखने को मिलता है। दूसरे के सुख की कामना करना ही इस देश की प्रवृति है। अभी भी कुछ लोग समाज को दिग्भ्रमित करने का षडय़ंत्र करते रहते हैं। लेकिन भारतीय संस्कृति बहुत समृद्ध है।

 

कार्यक्रम के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह घुरैया ने कहा कि मामाजी का जीवन पत्रकारिता व संघ के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने मामा माणिकचंद वाजपेयी के जीवन से संबधित अनेक प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला।


इससे पूर्व कार्यक्रम संयोजक आकाश सक्सेना ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, उन्होंने देश विरोधी ताकतों की गोद में बैठी मीडिया की षडयंत्रकारी लॉबी के दुष्प्रभावों के बारे में बताया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा पांचजन्य पत्रिका के राम मंदिर को समर्पित विशेष अंक का लोकार्पण भी किया।

स्तम्भ लेखन प्रतियोगिता के विजेता

प्रथम स्थान कु व्याप्ति उमडेकर, द्वितीय स्थान पर रामचरण चिराग रुचिर,तृतीय स्थान पर देवेंद्र सिंह कुशवाह एवं सांत्वना पुरस्कार अंकुर चौरसिया को मिला। प्रतियोगिता के निर्णायक रामकिशोर वाजपेयी एवं डॉ मन्दाकिनी शर्मा रहीं।

पत्रलेखन प्रतियोगिता के विजेता

प्रथम स्थान पर ज्योति दोहरे, द्वितीय पर देवेंद्र सिंह कुशवाह, तृतीय स्थान पर आयुसी पचौरी एवं सांत्वना पुरस्कार वीरेंद्र सिंह विद्रोही को मिला। इसके निर्णायकों में प्रवीण दुबे और ब्रजमोहन शर्मा शामिल रहे।

इसके पूर्व पत्रलेखन के विषय में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण दुबे ने विस्तार से प्रतिभागियों को बताया।वहीं स्तम्भलेखन पर रामकिशोर वाजपेयी ने प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रांत कार्यवाह यशवंत इंदापुरकर, प्रांत प्रचार प्रमुख ओमप्रकाश सिसोदिया, विभाग सह संघ चालक अशोक पाठक, डॉ देवेन्द्र सिंह गुर्जर, दिनेश चाकणकर, नवनीत शर्मा, रामकृष्ण उपाध्याय, राजेश वाधवानी, अशोक चौहान, चन्द्र प्रताप सिकरवार, नारायण पिरोनिया आदि उपस्थित थे।