“भारत को जानो, भारत को मानो, भारत को बनाओ और भारत के बनो” : सुरेश "भैयाजी" जोशी

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    09-Aug-2026
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सुरेश
 
 
सस्कृत ग्राम झिरी में तीन दिवसीय प्रवास के दौरान ग्राम विकास, युवा शक्ति और सामाजिक समरसता पर दिया जोर
 
झिरी, राजगढ़़। देशभर में संस्कृत संभाषण के लिए पहचान बना चुका मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले का संस्कृत ग्राम झिरी अब ग्राम विकास की गतिविधियों के लिए भी उदाहरण बन रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ग्राम विकास गतिविधि के अंतर्गत प्रभात ग्राम के रूप में विकसित हो रहे झिरी में संघ के अखिल भारतीय अधिकारी सुरेश जोशी ‘भैया जी’ का 5 से 7 अगस्त तक तीन दिवसीय प्रवास हुआ। इस दौरान उन्होंने मातृशक्ति, युवाओं और ग्राम विकास समिति के साथ बैठक कर ग्राम के सर्वांगीण विकास, संस्कार, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर संवाद किया।
 
 
ग्राम में प्रवेश के दौरान ग्रामवासियों ने संस्कृत भाषा में जयघोष के साथ सुरेश जोशी का स्वागत किया। तीन दिवसीय प्रवास के दौरान ग्राम विकास समिति की बैठक, मातृशक्ति एवं युवाओं के साथ संवाद तथा ग्रामोत्सव सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।
 
 

सुरेश  
 
माताएं बच्चों को संस्कारवान और देशभक्त नागरिक बनाएं
 
मातृशक्ति की बैठक को संबोधित करते हुए भैया जी ने माताओं से अपने बच्चों को संस्कारयुक्त और देशभक्त नागरिक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार ही बालक के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला है। परिवार में मिलने वाले संस्कार ही आगे चलकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में भूमिका निभाते हैं।
 
 
युवाओं के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि आज की तरुणाई देश को उच्च स्तर पर ले जाने की क्षमता रखती है। विज्ञान, तकनीक, कृषि, अंतरिक्ष, सुरक्षा और खेल सहित प्रत्येक क्षेत्र में युवाओं ने देश का परचम विश्व में लहराया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत होना आवश्यक है।
 
 
उन्होंने कहा, “देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।” इसी भाव के साथ उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में “भारत को जानो, भारत को मानो, भारत को बनाओ और भारत के बनो” के भाव को अपनाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र निर्माण के लिए योगदान देगा तो भारत निश्चित रूप से परम वैभव की ओर आगे बढ़ेगा।
 
 
गांव को परिवार, संस्कार, शिक्षा और पर्यावरण से युक्त बनाने का आह्वान
 
ग्राम विकास समिति की बैठक में भैया जी ने कहा कि देश का वास्तविक स्वरूप गांवों में बसता है। भारत माता को ग्रामवासिनी और भारत को कृषि प्रधान देश कहा गया है, जबकि किसान को अन्नदाता का सम्मान प्राप्त है। इसलिए गांवों का विकास ही राष्ट्र के विकास की आधारशिला है।
 

सुरेश  
 
 
उन्होंने कहा कि गांव को अधिक उन्नत और खुशहाल बनाने के लिए उसे पांच विशेषताओं से युक्त बनाना होगा। उन्होंने परिवार युक्त, संस्कार युक्त, शिक्षा युक्त और पर्यावरण युक्त गांव बनाने पर जोर दिया तथा कहा कि ऐसा गांव विकसित किया जाए, जिसे देखने और उससे सीखने के लिए दूसरे गांवों के लोग आएं।
 
 
ग्रामोत्सव में दिखी ग्रामीण जीवन की झलक
 
ग्राम विकास समिति द्वारा आयोजित ग्रामोत्सव में ग्रामीण जीवन और पारंपरिक गतिविधियों की झलक देखने को मिली। ग्राम की महिलाओं ने छाछ बनाने, चक्की पीसने सहित पुराने ग्रामीण जीवन से जुड़े विभिन्न क्रियाकलापों का मंचन किया। कार्यक्रम में संस्कृत भाषा में रंगमंचीय प्रस्तुतियां भी हुईं।
 
 
इस अवसर पर ग्राम की विभिन्न प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह में सुरेश जोशी के साथ कार्यक्रम के अध्यक्ष पंचमुखी हनुमान मंदिर उदासीन आश्रम के महंत डॉ. महेशानंद जी महाराज उपस्थित रहे।
 
 
हिंदू पहचान के साथ हिंदू आचरण वाला गांव बनाएं
 
ग्रामोत्सव को संबोधित करते हुए भैया जी ने कहा कि ग्राम विकास केवल योजनाओं से नहीं होगा, बल्कि गांव की वास्तविक समस्याओं को चिन्हित कर उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि हमारा गांव केवल हिंदू पहचान वाला ही नहीं, बल्कि हिंदू आचरण वाला भी होना चाहिए।
 
 
उन्होंने गांवों को चार बुराइयों से मुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारा गांव विवाद मुक्त, गंदगी मुक्त, नशा मुक्त और भेदभाव मुक्त होना चाहिए।
 
 
उन्होंने कहा कि भेदभाव मुक्त गांव और भेदभाव मुक्त हिंदू समाज के निर्माण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। नशा और व्यसन मुक्त समाज का निर्माण होने पर ही समाज अन्य बुराइयों से प्रभावी ढंग से लड़ सकेगा।
 
 
गोआधारित कृषि और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
 
भैया जी ने गोआधारित कृषि को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भूमि को सुजलाम-सुफलाम बनाने के लिए प्राकृतिक और गोआधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने की दिशा में काम करना चाहिए। गौमाता के गोमूत्र और गोबर से निर्मित उत्पादों के माध्यम से कृषि को अधिक प्राकृतिक और टिकाऊ बनाने पर उन्होंने बल दिया।
 
 
“हम भारत के लोग” की भावना से मजबूत होगा राष्ट्र
 
राष्ट्र की एकता का उल्लेख करते हुए भैया जी ने संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त “हम भारत के लोग” शब्दों का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि इसमें हमें किसी प्रांत, भाषा या जाति के आधार पर अलग नहीं किया गया है। हम सभी भारत के लोग हैं और इसी एकात्म भाव के कारण हम भारत माता की जय का उद्घोष करते हैं।
 
 
उन्होंने कहा कि भारत का स्वर्णिम इतिहास रहा है और अब देश विश्व में नए स्थान की ओर आगे बढ़ रहा है। दुनिया भारत को सम्मान की दृष्टि से देख रही है। ऐसे समय में भारत के गौरवशाली इतिहास का अगला अध्याय लिखने की जिम्मेदारी समाज की है।
 
 
उन्होंने आह्वान किया कि सभी मिलकर भारत का “सातवां स्वर्णिम पृष्ठ” लिखने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। ऐसा शक्तिशाली, समृद्ध और संस्कारित भारत बनाना है जो विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम हो और जिसे कोई पराजित न कर सके।
 
 
उन्होंने कहा, “सज्जन लोगों को शक्तिशाली बनना चाहिए और शक्तिशाली समाज को सज्जन बनना चाहिए। तभी भारत माता विश्वगुरु बनेगी।”
 
 
भैया जी ने कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। “वंदेमातरम्” कहने के साथ उसके भाव को अपने आचरण में भी उतारना होगा। उन्होंने ग्रामवासियों से ग्राम विकास और सामाजिक परिवर्तन के लिए संकल्प लेकर निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।