सोनम वांगचुक की पत्नी ने ‘आंदोलनजीवियों’ की दुकान उजाड़ दी

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    20-Jul-2026
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सोनम वांगचुक की पत्नी ने ‘आंदोलनजीवियों’ की दुकान उजाड़ दी 
 
 
दिल्ली। जंतर-मंतर पर आज शाम जो दृश्य देखने को मिला, वह राजनीतिक थिएटर का बेहतरीन मिसाल था। सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने माइक थामा और एक साधारण-सा बयान दे दिया, जिसने कई 'क्रांतिकारी' दुकानों पर ताला जड़ दिया।
 
"अगर राजनीतिक नेता अस्पताल जाकर सोनम से मिलें और उन्हें भरोसा दिला दें कि संसद सत्र में शिक्षा की जवाबदेही का मुद्दा उठाएंगे, तो सोनम कल अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे।"
 
बस। इतना ही।
 
न कोई धरना, न कोई चक्का जाम, न कोई इस्तीफे की मांग। खासकर धरमेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो सोनम के शब्दों में कहीं था ही नहीं। जैसे किसी ने अरुंधति सुजेना रॉय, कॉलिन गोंसाल्वेस, योगेन्द्र यादव के लिखे पूरे स्क्रिप्ट को बीच में ही फाड़कर फेंक दिया हो।
 
अब देखिए मजा। राकेश टिकैत, अभिजीत दिपके, चंद्रशेखर आजाद, विजेता दहिया, संजय सिंह, मनोज झा — ये सारे 'जन-नेता' जो शिक्षा के मुद्दे पर सोनम की भूख हड़ताल को अपनी दुकान खोलने का सुनहरा मौका समझ रहे थे, उनकी सारी तैयारी धरी की धरी रह गई।
 
कल तक तो ये लोग सोनम को अपना हथियार बना रहे थे। "देखो, मोदी सरकार शिक्षा का गला घोंट रही है, प्रधान इस्तीफा दो!" का नारा लगाकर कुदरती बिरयानी बांट रहे थे। इन महानुभावों को लगा था कि इस बार फिर वही पुराना फॉर्मूला चल जाएगा — कोई मुद्दा पकड़ो, कोई चेहरा आगे करो, खुद पीछे से वोट और वायरल फेम बटोर लो।
 
लेकिन सोनम ने, या कहें उनकी पत्नी ने, एक ही वाक्य में सबकी दुकान उजाड़ दी।
कोई इस्तीफा नहीं। कोई व्यक्तिगत हमला नहीं। सिर्फ शिक्षा में जवाबदेही। बस।
अब ये सारे ' आंदोेलनजीवी योद्धा" क्या करें?
 
सोनम की भूख हड़ताल को कुदरती बिरयानी बांटने वालों ने अपना राजनीतिक स्टॉक बढ़ाने का अवसर समझ लिया था।
 
जंतर-मंतर पर आज जो हवा चली, वो क्रांति की नहीं, हकीकत की थी। और हकीकत ने कई दुकानों का सामान एक झटके में बिखेर दिया। अब ये 'आंदोलनजीवी' सोच रहे होंगे — अगली बार किस मुद्दे पर 'जन-आंदोलन' का ड्रामा रचा जाए? क्योंकि इस बार तो सोनम ने स्क्रिप्ट ही बदल दी।
 
लेकिन षडयंत्रकारियों का गिरोह इतनी आसानी से मानेगा नहीं। जो मंच के पीछे थे, धीरे धीरे मंच पर आकर कब्जा लेने लगे थे। सोनम के एक बयान ने उनके इरादे के गुब्बारे को फिलहाल पंचर दिया है। अब जंतर मंतर पर बैठे पंचर ठीक करने वाले कल कौन सा नया बखेड़ा खड़ा करते हैं, देखते रहिए।