जनस्वास्थ्य पर मंडराता संकट!

भोपाल में पकड़ा गया अवैध कफ सिरप नेटवर्क

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    05-Jun-2026
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kuf siyrup
 
 
आयुष पंडाग्रे
लेखक पत्रकारिता के विद्यार्थी हैं 
 
 
भोपाल में नकली और प्रतिबंधित कफ सिरप के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। राजधानी के पटेल सिटी क्षेत्र में मध्य प्रदेश एसटीएफ की कार्रवाई में लगभग 50 हजार बोतलें, री-पैकेजिंग के लिए इस्तेमाल की जा रही मशीनें और एक संगठित सप्लाई नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पहली नजर में यह मामला अवैध दवा कारोबार का प्रतीत होता है, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो रहा है कि इसके प्रभाव केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य, युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, फर्जी ड्रग लाइसेंस और प्रशासनिक निगरानी की कमजोरियों से जुड़े कई गंभीर प्रश्न इस कार्रवाई के बाद सामने खड़े हो गए हैं। तीन नाबालिगों सहित 10 आरोपितों की गिरफ्तारी और मध्यप्रदेश के अनेक जिलों तक फैले कथित वितरण तंत्र ने इस आशंका को भी बल दिया है कि यह किसी एक फैक्ट्री का नहीं, बल्कि कहीं अधिक व्यापक और संगठित नेटवर्क का मामला हो सकता है।
 
 
सात माह से चल रहा था अवैध कारोबार
 
 
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि पटेल सिटी स्थित मकान में पिछले लगभग सात माह से अवैध रूप से कफ सिरप की री-पैकेजिंग और वितरण का काम किया जा रहा था। आरोपियों ने मकान किराए पर लेकर वहां मशीनें स्थापित की थीं और बड़ी मात्रा में कोडीनयुक्त कफ सिरप को नए लेबल लगाकर बाजार में भेजा जा रहा था।
 
 
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय तक यह गतिविधि जारी रहने के बावजूद स्थानीय पुलिस और संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इससे पहले भी भोपाल के जगदीशपुर, ईंटखेड़ी और बगरौदा औद्योगिक क्षेत्र में ऐसी फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबारियों के हौसले कम नहीं हुए। एक्सपायरी हटाकर दोबारा बेची जा रही थीं दवाएं एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार आरोपी दिल्ली और हरियाणा से 'ऑनरेक्स' और 'ऑफ कफ' नामक कफ सिरप की खेप मंगवाते थे। इसके बाद बोतलों से मूल बैच नंबर और एक्सपायरी डेट हटाकर नए रैपर चिपकाए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य दवा की वास्तविक पहचान छिपाना और एक्सपायर्ड अथवा संदिग्ध दवाओं को दोबारा बाजार में बेचना था। मौके से बड़ी संख्या में खाली शीशियां, रैपर, पैकेजिंग सामग्री, सीलिंग मशीनें और एक लोडिंग वाहन भी बरामद किया गया। एसटीएफ ने जब्त किए गए सिरप के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है।
  
 
सात माह से चल रही थी अवैध फैक्ट्री
 
 
यह अवैध फैक्ट्री करीब सात माह से संचालित हो रही थी, जिसकी भनक स्थानीय गांधीनगर थाने को नहीं लगी। इससे पहले भी जगदीशपुर (बैरसिया रोड), ईंटखेड़ी और बगरौदा औद्योगिक क्षेत्र (कटाराहिल्स) में अवैध फैक्ट्रियां पकड़ी जा चुकी हैं, लेकिन स्थानीय पुलिस ने इससे कोई सबक नहीं लिया।
 
 
एक्सपायरी डेट हटाकर दोबारा कर रहे थे पैकिंग
 
 
एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपित थोक बाजार से भारी मात्रा में 'आनरेक्स' और 'आफ कफ' नामक सीरप के कार्टन मंगवाते थे। इसके बाद मूल लेबल को खरोंचकर बिना बैच नंबर के दोबारा पैकिंग करते थे। मकान मालिक जयदीप सिंह से आरोपितों ने मकान किराए पर लिया था। यहां बकायदा मशीनें लगाकर एक्सपायर्ड माल को री-पैकेज किया जा रहा था, ताकि बाजार में धड़ल्ले से खपाया जा सके और पकड़े जाने पर सोर्स ट्रेस न हो सके। एसटीएफ ने कफ सीरप के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं। इस अमानक कफ सीरप पर कीमत 210 रुपये लिखी गई है। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि नशीली कफ सिरप की कीमत डेढ़ करोड़ों रुपये है।
 
 
एक वर्ष में 12 हजार पेटियां खपाने का खुलासा
 
 
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि पिछले एक वर्ष के दौरान इस नेटवर्क ने भोपाल, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, रीवा, सतना और अन्य जिलों में 12 हजार से अधिक पेटियां सप्लाई की थीं। एक पेटी में लगभग 120 बोतलें होती हैं और प्रत्येक बोतल की अधिकतम खुदरा कीमत लगभग 201 रुपये अंकित थी। जांच के अनुसार सप्ताह में दो बार 125-125 पेटियां दिल्ली और हरियाणा से मंगवाई जाती थीं। इसके बाद भोपाल में री-पैकेजिंग कर ग्रामीण क्षेत्रों तथा छोटे कस्बों के मेडिकल स्टोर्स तक पहुंचाया जाता था।
 
 
ग्रामीण क्षेत्रों को बनाया गया निशाना
 
 
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने जानबूझकर ऐसे क्षेत्रों को चुना जहां दवाओं के बैच नंबर, लाइसेंस और एक्सपायरी की नियमित जांच नहीं होती। ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों के मेडिकल स्टोर इस नेटवर्क के प्रमुख ग्राहक थे। जांच में यह भी सामने आया है राजधानी भोपाल के साथ महाकौशल, ग्वालियर-चंबल और विंध्य क्षेत्र में भी नकली और अवैध कफ सिरप की सप्लाई होती थी. एसटीएफ ने बालकृष्ण प्रजापति नाम के एक अन्य मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया हैं जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ड्रग लाइसेंस हासिल कर पिछले एक वर्ष से संगठित तरीके से नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार को संचालित कर रहा था.
 
 
आरोपी बालकृष्ण प्रजापति 2018 से 2022 के बीच एक अन्य डमी फार्मास्युटिकल फर्म भी कर चुका है संचालित
 
 
जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है. एसटीएफ के मुताबिक बालकिशन प्रजापति इससे पहले वर्ष 2018 से 2022 के बीच "दिव्यांश ट्रेडर्स" नामक एक अन्य डमी फार्मास्युटिकल फर्म भी संचालित कर चुका है. इस फर्म के लिए भी कथित तौर पर फर्जी तरीके से ड्रग लाइसेंस प्राप्त किया गया था और उसके माध्यम से अवैध खरीद-फरोख्त की गतिविधियां संचालित की गई थीं एसटीएफ का मानना है कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क का मामला है, जो फर्जी फर्मों और ड्रग लाइसेंसों का उपयोग कर नशीली कफ सिरप की अवैध सप्लाई कर रहा था.
 
 
इन आरोपितों की भी हुई है गिरफ्तारी
 
 
मौके से पकड़े गए मुख्य आरोपितों में आकाश भाटी व नरेश भाटी (श्यामपुर, सीहोर), चन्द्रपाल मुखिया व हरिओम मोगिया (इछावर, सीहोर), धानसिंह व अजय मोगिया (राजगढ़) और अकील खान (परवलिया, भोपाल) शामिल हैं। इनके अलावा गैंग में शामिल तीन नाबालिगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मौके से भारी मात्रा में खाली शीशियां, रैपर, सीलिंग मशीन और एक लोडिंग गाड़ी भी जब्त की गई है।इनके अलावा तीन नाबालिगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। जांच में सामने आया है कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग थी। कोई मजदूरों की व्यवस्था करता था, कोई दवा की खेप मंगवाता था, जबकि कुछ लोग लेबल बदलने और वितरण नेटवर्क का संचालन करते थे।
 
 
मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए घोषित किया गया इनाम
 
 
एसटीएफ ADG ने फरार चल रहे तीन मास्टरमाइंड पर इनाम घोषित किया है. आरोपियों के लिए पुलिस ने 30000 रुपए का इनाम रखा है. एसटीएफ के एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने कहा कि अर्जुन मालवीय उर्फ निखिल, नितिन साहू उर्फ राहुल, सलमान खान उर्फ बाबू भाई अभी फरार चल रहे हैं. ये लोग ग्रामीण क्षेत्रों में इल्लीगल कफ सिरप खपाया करते थे. ये आरोपी पूरे सप्लाई नेटवर्क की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और इनके पकड़े जाने के बाद कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। मामले में फूड एंड ड्रग्स विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है और जल्द ही कुछ बड़े चेहरों की गिरफ्तारी हो सकती है।
 
 
ड्रग लाइसेंस में भी बड़ा फर्जीवाड़ा
 
 
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। जिन दो ड्रग लाइसेंसों के आधार पर कफ सिरप की खरीद-बिक्री दर्शाई जा रही थी, उन पतों पर वास्तविक रूप से कोई दवा दुकान संचालित नहीं मिल पाई। एक लाइसेंस भोपाल के बागसेवनिया स्थित सुरेंद्र पैलेस के पते पर जारी किया गया था, जबकि दूसरा रायसेन जिले के मंडीदीप क्षेत्र के पते पर दर्ज था। एसटीएफ की टीम जब इन स्थानों पर पहुंची तो वहां दवा कारोबार से संबंधित कोई गतिविधि नहीं मिली।
इससे यह आशंका मजबूत हुई है कि लाइसेंस केवल कागजी औपचारिकता पूरी करने और अवैध कारोबार को वैध दिखाने के लिए उपयोग किए जा रहे थे।
 
 
मंडीदीप में मिली डमी दुकान
 
 
जांच में पता चला कि मंडीदीप स्थित विंग्स लाइफ रेमिडीज नामक दुकान केवल कागजों पर संचालित दिखाई जा रही थी। वास्तविकता में वहां दवा का कोई कारोबार नहीं हो रहा था।
एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि लाइसेंसधारकों की वास्तविक भूमिका क्या थी और क्या वे इस अवैध कारोबार की जानकारी रखते थे या केवल नाममात्र के लाइसेंसधारक थे।
 
 
दवा कंपनी का प्रतिनिधि भी गिरफ्तार
 
 
मामले की जांच आगे बढ़ने पर एसटीएफ ने एक दवा कंपनी के प्रतिनिधि को भी गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने कोडीनयुक्त कफ सिरप के लिए लाइसेंस ले रखा था, लेकिन उसकी आड़ में अवैध स्टोरेज और सप्लाई का काम किया जा रहा था। पुलिस अब एक अन्य दवा कारोबारी की तलाश कर रही है, जिसके नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है।
 
 
मजदूरों को दी जा रही थी तीन गुना मजदूरी
 
 
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने विभिन्न क्षेत्रों से लोगों को काम पर लगाया था। उन्हें सामान्य मजदूरी की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक भुगतान किया जाता था। कई लोगों को प्रति घंटे 200 रुपये तक दिए जाते थे ताकि वे बिना सवाल किए पैकेजिंग और लेबलिंग का काम करते रहें।
 
 
दिल्ली और हरियाणा तक पहुंचेगी जांच
 
 
एसटीएफ की जांच अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर पहुंच चुकी है। अधिकारियों के अनुसार दिल्ली और हरियाणा स्थित सप्लायरों की भूमिका की भी जांच की जा रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में कफ सिरप किन माध्यमों से और किन दस्तावेजों के आधार पर भेजा जा रहा था।
जांच एजेंसी ने संबंधित दवा कंपनियों से भी जानकारी मांगी है कि क्या वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में माल मध्य प्रदेश भेजा गया था।
 
 
मुबारकपुर में बनाया था गोदाम, जारी है छापेमारी
 
 
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद एसटीएफ को मुबारकपुर में बनाए गए गोदाम की जानकारी मिली, जहां कच्चा माल और पैक की गई बोतलें रखी जाती थीं। इसके बाद टीम ने इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। पुलिस को आशंका है कि मुबारकपुर और आसपास के इलाकों में गिरोह के और भी ठिकाने या डंपिंग यार्ड हो सकते हैं।
 
 
बिना लाइसेंस बेचने पर 10 साल की सजा
 
 
कोडीन युक्त सिरप अवैध या बिना लाइसेंस के बेचने पर 10 साल की सजा है। यर कफ सिरप नशे का काम करती है। इसमें अफीम का इस्तेमाल किया जाता है। 1000 एमएल कफ सिरप रखने के लिए लाइसेंस जरूरी है। और यह कमर्शियल माना जाता है।
 
 
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
 
 
विशेषज्ञों कहना है कि अमानक और री-पैकेज की गई दवाएं सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। कोडीनयुक्त कफ सिरप का दुरुपयोग नशे के रूप में किया जाता है और इसके अनियंत्रित उपयोग से युवाओं में नशे की लत बढ़ सकती है।
 
 
मध्यप्रदेश पहले भी अमानक कफ सिरप के दुष्परिणाम झेल चुका है। छिंदवाड़ा और बैतूल जिले में अमानक कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में 25 बच्चों की मौत हो गई थी।
 
 
जांच जारी, बड़े खुलासों की संभावना
 
 
एसटीएफ की पांच विशेष टीमें इस पूरे नेटवर्क की जांच में लगी हुई हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। दवा बाजार, सप्लायर, लाइसेंसधारक और वितरण नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। भोपाल में पकड़ी गई यह अवैध फैक्ट्री केवल एक अपराध का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, दवा नियमन और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े करती है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी थीं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।