राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यभारत प्रांत के 15 दिवसीय घोष वर्ग का प्रकट कार्यक्रम एवं समापन समारोह शुक्रवार को न्यू टेकरी रोड स्थित गुरुदेव पब्लिक स्कूल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में घोष साधकों द्वारा सामूहिक घोष प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।
समारोह के मुख्य वक्ता मध्यभारत प्रांत के सह प्रांत संघ चालक राजेश सेठी ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र के प्रति “स्व” का भाव रखना होगा, तभी समाज परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इसी कारण “स्व” के भाव को अपने “पंच परिवर्तन” में स्थान दिया है। स्व का अर्थ है — अपने देश पर गर्व, अपनी संस्कृति पर मान और अपने पूर्वजों पर अभिमान।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय भारत का अमृतकाल है और भारत पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में गिलहरी के समान योगदान देना चाहिए। केवल “भारत माता की जय” बोलना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारना आवश्यक है।
श्री सेठी ने कहा कि भारत ने कभी किसी देश को शक्ति के बल पर नहीं जीता, बल्कि संस्कारों के माध्यम से विश्व को दिशा दी है। यही कारण है कि आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का मंत्र विश्व में गूंज रहा है।
संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल हर्ष का विषय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का अवसर भी है। संघ समाज जीवन में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की पाठशाला है। संघ कार्य में अहंकार का त्याग आवश्यक है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाप्रभु मंदिर कोटा (राजस्थान) के आचार्य विनय गोस्वामी जी महाराज ने राष्ट्र धर्म को सर्वोच्च धर्म बताया। उन्होंने कहा कि यदि हम राष्ट्र धर्म को धारण कर लें, तो कोई भी शक्ति हमारे देश का अहित नहीं कर सकती।
आचार्य जी ने घोष की व्याख्या करते हुए कहा कि घोष कंठ से निकला दिव्य स्वर है तथा भगवान शंकर का डमरू भी घोष का ही स्वरूप है।
मंच पर विभाग संघचालक अशोक सिंह कुशवाह एवं जिला संघचालक गिर्राज अग्रवाल भी उपस्थित रहे। वर्ग का प्रतिवेदन वर्ग कार्यवाह मनमोहन किरार ने प्रस्तुत किया तथा आभार प्रबंध प्रमुख मनोज भदौरिया ने व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने घोष की सुरीली धुनों के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आकृति का निर्माण भी किया, जिसने सभी उपस्थित जनों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम स्थल पर महापुरुषों के संदेशों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मध्यभारत प्रांत घोष वर्ग 1 मई से 15 मई तक आयोजित हुआ, जिसमें प्रांत के विभिन्न जिलों से आए स्वयंसेवकों ने घोष प्रशिक्षण प्राप्त किया।