गुना। गुना जिले के मोहनपुर खुर्द गाँव में ईस्टर के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर धर्मांतरण और अंधविश्वास फैलाने के आरोप सामने आए हैं। जिला मुख्यालय से लगभग 22 किलोमीटर दूर आयोजित इस कार्यक्रम में दो बकरे और 40 मुर्गे काटकर भोज तैयार किया गया, जिसमें 300-400 जनजातीय लोगों को शामिल किया गया। कार्यक्रम के दौरान “प्रार्थना से बीमारी ठीक होती है” और “प्रार्थना से नशा छूटता है” जैसे दावे किए गए।
स्थानीय स्तर पर यह भी सामने आया कि कार्यक्रम में शामिल कई लोगों को पहले झाड़-फूंक जैसे पारंपरिक उपायों से निराशा मिली थी, जिसके बाद उन्हें “यीशु की चंगाई” का विकल्प बताया गया। मेहंदी बाई ने बताया कि उन्होंने पहले देवी-देवताओं के माध्यम से झाड़-फूंक कराई, लेकिन लाभ नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें ईसा मसीह के माध्यम से उपचार का सुझाव दिया गया। वहीं, कार्यक्रम के संचालक ने भी स्वीकार किया कि लोग पहले जादू-टोने के पास गए थे, लेकिन राहत नहीं मिली।
कार्यक्रम में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए, जहाँ बीमार व्यक्तियों को चिकित्सा सुविधा के बजाय प्रार्थना के माध्यम से उपचार का भरोसा दिया गया। ज्ञान सिंह, जिनके हाथ-पैर प्रभावित बताए गए, गीता बाई, जिनका एक्सीडेंट हुआ था, और रुकमणी, जिन्हें कमजोरी की शिकायत थी। इन सभी को “चंगाई” के नाम पर प्रार्थना कराई गई।
आयोजकों द्वारा “धर्म परिवर्तन” के बजाय “मन परिवर्तन” जैसे शब्दों का उपयोग किया गया। संचालक उत्तम ने कहा कि “धर्म तो कुछ नहीं, मन परिवर्तन है।” वहीं रुकमणी ने स्वयं को ईसाई न बताते हुए “परमेश्वर के पुत्र में विश्वास” की बात कही। इस प्रकार की भाषा को लेकर यह भी चर्चा है कि यह मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के प्रावधानों से बचने के लिए अपनाई जा रही हो सकती है।
इस मामले में मिशनरी शिक्षा संस्थानों की भूमिका को लेकर भी प्रश्न उठे हैं। विशाल नामक युवक, जिसकी पढ़ाई दतिया के “नया जीवन मिशन स्कूल” में हुई, ने बताया कि वह गाँव-गाँव जाकर ईसा मसीह के वचन फैलाना चाहता है। उसने यह भी कहा कि लगभग 20 वर्ष पहले क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियाँ नहीं थीं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक बड़ा कारण है। आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि गाँवों में सक्रिय रहते हैं, लेकिन बाद में स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना रहता है। ऐसे में बाहरी संगठन भोजन और अन्य माध्यमों से लोगों तक पहुँच बना रहे हैं।
मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के तहत प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना दंडनीय अपराध है। ऐसे में जिला मुख्यालय के निकट इस प्रकार की गतिविधियों के सामने आने के बाद प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर एसडीएम, तहसीलदार और पुलिस प्रशासन की सक्रियता को लेकर भी प्रश्न किए जा रहे हैं।