भारतीय शिक्षा विश्व कल्याण का माध्यम बनेगी: बी. आर. शंकरानन्द

भारतीय शिक्षण मंडल के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम आयोजित

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    16-Apr-2026
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मध्य भारत प्रांत
 
 
भोपाल। भारतीय शिक्षा भविष्य में विश्व कल्याण का माध्यम बनने वाली है। युद्धों और हिंसा से विश्व को मुक्त कराना है तो वह भारत के द्वारा और भारतीय शिक्षा के माध्यम से ही होगा। यह बात भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री बी. आर. शंकरानन्द ने कही। वे भारतीय शिक्षण मंडल के 57वें स्थापना दिवस पर भोपाल महानगर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 'शिक्षा में संस्कार : राष्ट्र निर्माण का आधार' विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे।
बुधवार को समन्वय भवन में इस आयोजन के मुख्य अतिथि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत एवं विशिष्ट अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक थे। भारतीय शिक्षण के प्रांत अध्यक्ष डॉ हरिहर वसंत गुप्ता एवं उपाध्यक्ष डॉ परिमला त्यागी भी मंचस्थ थीं।
 
 
श्री शंकरानन्द जी ने आगे कहा कि भारत को शक्तिशाली बनाना है तो यह शिक्षा के बिना संभव नहीं हो सकता। भारत एक नया अवतार लेकर विश्व के सामने प्रकट होने जा रहा है। इस संधिकाल में समाज और अधिक सजग रहने की आवश्यकता है।
 
 
उन्होंने कहा कि 190 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में हम गलत दिशा में चल रहे हैं। अब हमें अपने मार्ग पर चलना है और समाज को भ्रमित दिशा से बाहर निकालना है। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य निर्माण के साथ मनुष्य को निर्भय बनाना भी है। भारतीय शिक्षण मंडल इसके लिए कार्य कर रहा है।
 
 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल राष्ट्र के जागरण के क्षेत्र में लगातार सक्रिय है। शिक्षा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाए हैं। पूरे देश में मप्र पहला राज्य है जहां मेडीकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी भाषा में शुरू हुई है। संस्कार के बिना शिक्षा का कोई मूल्य नहीं है। आज समाज संस्कारों को भूलता जा रहा है। यह ठीक नहीं है। नई पीढ़ी में अनुशासन, सेवा, त्याग और नैतिकता का विकास
 
 
कार्यक्रम के विशिष्टअतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ संजय पाठक ने कहा कि संगठन भारतीय शिक्षा को पुनर्स्थापित करने के लिए 1969 से कार्य कर रहा है। देश जब स्वतंत्र हुआ उसकी अपेक्षा आज की स्थिति में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों आदि की संख्या कहीं अधिक बढ़ी है। इससे शिक्षा का व्याप भी बढ़ा है। हमने अपना भौतिक पक्ष सुदृढ़ किया है लेकिन आध्यात्मिक जीवन सुदृढ़ नहीं किया। इन दोनों पक्षों को सुदृढ़ करने का कार्य हमने कितना किया है यह आत्म चिंतन का विषय है। एक मनुष्य के रूप में हमारी प्रगति तभी संभव है जबकि इन दोनों पक्षों में संतुलन बनाते हुए इन्हें सुदृढ़ करने का कार्य करने में हम सक्षम हो सकेंगे।
 
मध्य भारत प्रांत
 
 
 
प्रारंभ में कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए संगठन के प्रांत अध्यक्ष डॉ हरिहर वसंत गुप्ता ने बताया ही देश भर में मध्य भारत प्रांत में संगठन उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। बीते 1 वर्ष में संगठन ने प्रांत में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
 
 
कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, शिक्षक, विद्यार्थी, युवा, मातृशक्ति सहित विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान उपस्थित रहे।
 
 
प्रदर्शनी भी लगाई
 
 
कार्यक्रम स्थल पर एक प्रदर्शनी भी लगाई गई जिसमें भारतीय शिक्षण मंडल के विभिन्न कार्यों एवं गतिविधियों को सुंदर तरीके से दर्शाया गया था।