100 वर्षों से युवाओं को राष्ट्र कार्य के लिए प्रेरित कर रहा है संघ – दत्तात्रेय होसबाले जी

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    30-Mar-2026
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dattatrey ji  
 
 
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त सामुदायिक भवन में आयोजित युवा एकत्रीकरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने युवाओं से संवाद के दौरान कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गत 100 वर्षों से युवाओं को राष्ट्र कार्य के लिए प्रेरित कर रहा है। संघ में सभी स्वयंसेवक हैं, संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण, समाज परिवर्तन और राष्ट्र को परम वैभव तक ले जाना है।
 
भारत को भारत बना कर रखना, भारत की भूमि भारतीयों के पास ही रहे अर्थात् अपनी भूमि अपने पास ही रहे, यह प्राथमिक मुख्य बात है। इस भूमि के काग़ज़ न हों तो भी अपने इतिहास और परंपरा है, इसलिए प्राचीन ग्रंथों में भारत और हिन्दुस्थान कहा है। हमारे पूर्वजों ने परंपरा से, संस्कृति से भारत को भारत बनाया, कहानियों, गीत, व्यवहार, नाम इत्यादि से भी भारत ही प्रकट होता है।
 
अपने पास 6000 वर्षों का ज्ञात इतिहास है, स्वामी नारायण संप्रदाय ने ‘10000 years of history by Swami Narayan’ पुस्तक में शोधपरक इतिहास लिखा है।
 
सरकार्यवाह जी ने कहा कि बर्बर आक्रांताओं के कारण हमारी परंपरा खंडित नहीं हुई, हमारे गोत्र हज़ारों वर्ष पुराने हैं, गोत्र हमें एकता का बोध भी करवाता है। गत 23 मार्च को भगत सिंह-सुखदेव-राजगुरू का बलिदान दिवस हमने मनाया। अंडमान में कालापानी में वीर सावरकर को कारागार हुआ, ऐसे ही असंख्य बलिदानों के कारण ही स्वतन्त्र भारत में हम आज सामान्य जीवन जी रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने व्यक्तिगत सुखों की चिंता न कर भारत माँ की सेवा का ही व्रत धारा। हम उनके ऋणी हैं।
 
उन्होंने कहा कि अपना जीवन गेंद और गोली की तरह नहीं है कि इधर फेंक दो, उधर फेंक दो। युवा ही राष्ट्र की रीढ़ हैं। संसार में सभी प्रकार के चुनौतीपूर्ण कार्य युवा ही कर रहे हैं। डॉ. जगदीश चन्द्र बसु को षड्यंत्रपूर्वक नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। वैज्ञानिक मारकोनी के पोते ने कोलकाता में यह कहा कि नोबेल पुरस्कार जगदीश चन्द्र बसु को ही मिलना चाहिए था।
 
 

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अमेरिका और जापान से सुपर कम्प्यूटर बनाने की चुनौती मिलने पर CDAC में वैज्ञानिक विजय भाटकर ने 150 युवाओं को प्रेरित कर विदेश जाने से रोककर परम कम्प्यूटर बनाया। देश का निर्माण ऐसे होता है। सांस्कृतिक परंपरा के आधार पर ही आधुनिकता को अपनाना होगा, अपनत्व को छोड़कर बाहर का नहीं अपनाना। यह सभी करने के लिए संगठित शक्ति चाहिए। अग्नि की उड़ान ‘ignited mind’ पुस्तक में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अबुल कलाम ने टीम वर्क का उदाहरण दिया।
 
उन्होंने कहा कि देश में अच्छी बातें भी और कमियाँ भी हैं, इसलिए बहुत से काम करने को हैं। प्रत्येक व्यक्ति कुछ ना कुछ कर सकता है, लंबे समय के लिए करे और प्रमाणिकता से करे, समाज के लिये करने के बदले में कुछ मिलना चाहिए, यह क्षुद्र विचार नहीं होना चाहिए। नित्य काम करते हुए भी हम राष्ट्र का काम कर सकते हैं यह भाव सभी युवाओं के मन में रहे।
 
टेक्नोलॉजी का कितना प्रयोग, युवाओं को ड्रग्ज से बचाना है। JNU में टुकड़े-टुकड़े के नारे, IIT में बीफ़ पार्टी कर आस्था पर चोट करना, दूसरों की भावनाओं को आहत करने का प्रयत्न व विद्वेष को बढ़ावा देने जैसे देश विघातक काम भी हो रहे हैं। इनसे सतर्क रहने की आवश्यकता है। नित्य काम करते हुए भी हम राष्ट्र का काम कर सकते हैं, यह भाव सभी युवाओं के मन में रहे।