दतिया। भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान के अंतर्गत आज ग्राम बिछरेटा, जिला दतिया में एक प्रेरणादायी एवं जागरूकता से परिपूर्ण भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण समाज को पारंपरिक कृषि पद्धतियों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा भूमि की उर्वरता बनाए रखने के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय संस्कृति के अनुरूप गौ माता एवं धरती माता के पूजन के साथ हुई। उपस्थित जनसमूह ने सामूहिक रूप से धरती माता की आरती कर यह संदेश दिया कि भूमि केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि हमारी जीवनदायिनी माता है, जिसका संरक्षण और संवर्धन हम सभी का कर्तव्य है।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की कृषि परंपरा सदियों से प्राकृतिक संतुलन पर आधारित रही है। हमारे किसान गोबर, गोमूत्र, फसल अवशेष और अन्य जैविक साधनों के माध्यम से भूमि का पोषण करते रहे हैं, जिससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रही, बल्कि पर्यावरण भी संतुलित रहा। इसी कारण भारतीय कृषि व्यवस्था लंबे समय तक समृद्ध और टिकाऊ बनी रही।
हालांकि, पिछले कुछ दशकों में रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों एवं खरपतवार नाशकों के अत्यधिक उपयोग ने भूमि की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। मिट्टी की प्राकृतिक संरचना कठोर होती जा रही है, उसकी उर्वरता घट रही है और उत्पादन भी अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रहा है। इस स्थिति को सुधारने के लिए पुनः प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों की ओर लौटना आवश्यक है। भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम में आसपास के आठ ग्रामों से आए किसान भाइयों, मातृशक्ति एवं ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। इस अवसर पर देशी बीजों का वितरण किया गया तथा प्रत्येक परिवार को गृह वाटिका (किचन गार्डन) विकसित करने हेतु पौधे भी प्रदान किए गए, ताकि आत्मनिर्भरता और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में भारत माता की आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ। पूरे आयोजन में ग्रामवासियों का उत्साह और सहभागिता उल्लेखनीय रही, जिसने यह स्पष्ट किया कि समाज प्राकृतिक कृषि और भूमि संरक्षण के प्रति सजग हो रहा है।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्रांत ग्राम विकास संयोजक श्री जितेन सिंह जादौन, जिला ग्राम विकास समिति के सदस्य श्री देवेंद्र जी सेंगर एवं श्री सोवन जी यादव, खंड संयोजक श्री प्रमोद जी यादव, ग्राम विकास समिति सदस्य श्री जितेन जी यादव, श्री राम की शरण जी तथा श्री नंदलाल जी पाल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कुल 185 लोगों की सहभागिता रही, जिसमें 48 मातृशक्ति एवं 137 पुरुष सम्मिलित थे।
यह आयोजन न केवल भूमि के प्रति संवेदनशीलता को पुनर्जीवित करने का प्रयास था, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ, समृद्ध और टिकाऊ कृषि व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुआ।