संघ की 100 वर्ष की यात्रा को बड़े पर्दे पर देख भावविभोर हुए दर्शक

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    02-Mar-2026
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बैतूल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष की गौरवगाथा पर आधारित फ़िल्म शतक का भव्य प्रदर्शन विगत दिवस बैतूल के प्रसिद्ध कांतिशिवा सिनेप्लेक्स में किया गया। इस अवसर पर नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, संघ के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा गणमान्य नागरिक परिवार सहित उपस्थित रहे।
 
देशभर में 20 फरवरी को प्रदर्शित हुई इस फ़िल्म में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की संगठनात्मक यात्रा, सेवा कार्यों और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को पहली बार बड़े पर्दे पर प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया है। फ़िल्म में संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी के जीवन से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंगों, उनके त्याग, दूरदृष्टि और संगठन निर्माण की भावना को संवेदनशीलता के साथ उकेरा गया है।
 
 
व्यापक संपर्क के बाद हुआ आयोजन
 
इस विशेष प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए पूर्व में नगर के सभी बस्ती प्रमुखों से संपर्क कर चर्चा की गई। बस्ती प्रमुखों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों के स्वयंसेवकों से व्यक्तिगत संवाद किया गया, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में परिवारों की गरिमामयी उपस्थिति सुनिश्चित हुई। आयोजन पूरे उत्साह और अनुशासनपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
 
तिलक और राष्ट्रगीत के साथ शुभारंभ
 
सिनेमा हॉल में प्रवेश के समय अतिथियों और स्वयंसेवकों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम्’ के साथ हुआ, जिसके बाद पूरा सभागार देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत हो गया।
 
दर्शकों ने सराहा प्रस्तुतीकरण
 
फ़िल्म के प्रदर्शन के दौरान “भारत माता की जय” के उद्घोष से सिनेमा हॉल गूंज उठा। दर्शकों ने संघ के विभिन्न कालखंडों, सेवा कार्यों, सामाजिक समरसता के प्रयासों और राष्ट्रीय चेतना के विस्तार को सजीव एवं प्रभावी बताया। कार्यक्रम के उपरांत अनेक उपस्थित नागरिकों और स्वयंसेवकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह फ़िल्म संघ के विचार और कार्यपद्धति को समझने का सशक्त माध्यम बनती है।
 
प्रार्थना के साथ समापन
 
फ़िल्म प्रदर्शन के पश्चात संघ की प्रार्थना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। अनुशासन, राष्ट्रभाव और आत्मीयता से परिपूर्ण इस आयोजन को उपस्थित सभी नागरिकों ने प्रेरणादायी बताया। नगर में आयोजित यह प्रदर्शन केवल एक फ़िल्म शो नहीं, बल्कि संघ के शताब्दी वर्ष की यात्रा को समझने और नई पीढ़ी तक उसके विचार पहुँचाने का सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।