A I के जमाने में वर्ष प्रतिपदा की प्रासंगिकता

विश्व संवाद केंद्र, भोपाल    16-Mar-2026
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- गिरीश जोशी
 
 
आज पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चर्चा चल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पूरी दुनिया के स्वरूप को बदलने जा रहा है। आज बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी गणना करना बड़ा आसान हो गया है। हम दिन - रात ,सप्ताह, माह, वर्ष यहां तक की युगों की गणना के बारे में भी हमारे शास्त्रों के माध्यम से जानते हैं।
 
प्राचीन काल की गणना
 
शास्त्रों में समय की सबसे बड़ी इकाई “कल्प’ को माना गया। एक कल्प में 432 करोड़ वर्ष होते हैं। एक हजार महायुगों का एक कल्प माना गया। इस समय श्वेतवाराह “कल्प’ चल रहा है. इस कल्प का वर्तमान में सातवां मन्वन्तर है, जिसका नाम वैवस्वत है। वैवस्वत मन्वन्तर के 71 महायुगों में से 27 बीत चुके हैं तथा 28 वीं चतुर्युगी के भी सतयुग, त्रेता तथा द्वापर बीत कर कलियुग का 5123वां वर्ष इस वर्ष प्रतिपदा से प्रारंभ होगा। इसका अर्थ है कि श्वेतवाराह कल्प में 1,97,29,49,122 वर्ष बीत चुके हैं। यानि सृष्टि का प्रारम्भ हुए 2 अरब वर्ष हो गये हैं। आज के वैज्ञानिक भी पृथ्वी की आयु 2 अरब वर्ष ही बताते हैं।
 
सबसे बड़ी इकाई की गणना के साथ-साथ प्राचीन भारत के वैज्ञानिक ऋषियों ने समय की सबसे छोटी इकाई “त्रुटि’ का भी आविष्कार किया था । “त्रुटि’ का मान एक सैकण्ड का 33,750 वां भाग है।
 
 
AI का अंजान खतरा
 
इससे यह बात समझ में आती है कि उसे समय भी कोई पद्धति मौजूद थी जो आज हमारी जानकारी से दूर है।
इसलिए हमें आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तकनीक चमत्कृत भी करती है और कुछ हद तक लोगों को डराती भी है। डरने के बड़े कारणों में से एक हमारे युवा वर्ग की नौकरी पर मँडराता संभावित खतरा और दूसरा कारण इस तकनीक का अपने आप को विकसित करना जिससे यह आशंका है कि कहीं यह मानवीय क्षमता, योग्यताओं पर हावी ना हो जाए।
 
 
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खोजकर्ता जेफरी हिन्टन जिन्हें न्यूरल नेटवर्क बनाने के लिए 2024 का नोबेल पुरस्कार मिला ने एक पत्रकार को साक्षात्कार देते समय कहा था कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ट्रिलियन न्यूरल नेटवर्क के साथ काम कर रहा है, जबकि मानवीय मस्तिष्क में सौ ट्रिलियन न्यूरल नेटवर्क होते हैं। लेकिन उसके बावजूद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्षमता मानव की क्षमता से कई गुना अधिक है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जब इसकी क्षमता आदमी के दिमागी क्षमता की बराबरी कर लेगी तब क्या होगा ।
 
 
AI की संभावनाएं
 
मैट शुमर पिछले छह वर्षों से AI के क्षेत्र में काम कर रहे हैं । उन्होंने कई सफल AI उत्पाद बनाए हैं। हाल ही में उन्होंने “Something Big Is Happening” (कुछ बहुत बड़ा हो रहा है…) शीर्षक से एक लेख लिखा, जिसे केवल चौबीस घंटों में चार करोड़ से अधिक लोगों ने पढ़ा। उस लेख में कुछ महत्वपूर्ण बातें उन्होने लिखी है – “कुछ महीने पहले तक मुझे AI को बार-बार निर्देश देने पड़ते थे और उसकी गलतियाँ सुधारनी पड़ती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मैं सिर्फ काम का स्वरूप बता देता हूँ, चार घंटे के लिए कंप्यूटर से दूर चला जाता हूँ, और जब वापस आता हूँ तो काम 100% पूरा होता है। अब AI के पास केवल जानकारी ही नहीं, बल्कि ‘निर्णय-क्षमता’ (Judgement) और ‘रुचि-समझ’ (Taste) भी विकसित हो गई है।
 
 
यह सब इतनी तेजी से क्यों हो रहा है? क्योंकि अब AI स्वयं को विकसित करने में भी मदद कर रहा है। GPT-5.3 Codex ऐसा पहला मॉडल है जिसने अपने ही विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जैसे-जैसे यह फीडबैक लूप चलता जा रहा है, प्रगति की गति और तेज होती जा रही है। शोधकर्ता इसे “इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन” यानी बुद्धिमत्ता का विस्फोट कह रहे हैं। अनुमान है कि 2027 तक हमारे पास ऐसी प्रणालियाँ होंगी जो लगभग हर काम में मनुष्य से अधिक सक्षम होंगी।“
 
 
AI जैसी शक्ति का सामना
 
 
शास्त्रों में एक वर्णन है कि हर युग में कौन सी शक्ति से हम दुनिया में शांति, स्थिरता और उत्कर्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। शास्त्र कहते है-" त्रेतायां मंत्र-शक्तिश्च, ज्ञानशक्तिः कृते-युगे। द्वापरे युद्ध-शक्तिश्च, संघशक्ति कलौ युगे।
 
हमारे आख्यानों में प्रतीकों और प्रसंग के माध्यम से हर युग में उभरने वाली शक्ति का संकेत किया गया है। आज जिस तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्वयं को बनाने की स्थिति में आता दिखाई देता है इस प्रकार की शक्ति रक्तबीज नामक असुर के माध्यम से हमें पूर्व से ही बताई जा चुकी है। रक्तबीज का संहार करने के लिए माँ काली अपने हाथ में खप्पर का उपयोग कर रक्तबीज के एक बूंद रक्त को भी धरती पर न गिरने देने के आख्यान से हमें इस प्रकार स्वयं को बनाने वाली शक्ति पर नियंत्रण पाने का रहस्य समझाया गया है।
 
 
हमारे पास क्या विकल्प है
 
खप्पर एक पात्र है, पात्र से ही पात्रता शब्द आता है। यानि हमे अपनी पात्रता इस प्रकार से बढ़ानी पड़ेगी ताकि हम इंटेलिजेंस एक्सप्लोजन” यानी बुद्धिमत्ता के विस्फोट को इसमे समेट सके। इस दौर अपनी पात्रता बढ़ाने के लिए बक़ौल मैट शुमर कुछ महत्वपूर्ण बातें ध्यान में रखना जरूरी है - “मानवीय कौशल (Soft Skills) पर निवेश करें - AI तर्क और डेटा को संभाल सकता है, लेकिन सहानुभूति (Empathy), बातचीत/समझौता कौशल (Negotiation) और नेतृत्व (Leadership) अब भी मानवीय क्षेत्र के विषय हैं और भविष्य में भी रहेंगे। इसलिए पब्लिक स्पीकिंग, लेखन और लोगों से संपर्क - संबंध बनाने जैसे नेतृत्व के कौशल सीखें, क्योंकि इन्हें AI आसानी से प्रतिस्थापित नहीं कर पाएगा।
 
 
स्वास्थ्य और मानसिक शक्ति का ध्यान रखें- AI क्रांति केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक उतार-चढ़ाव भी लेकर आती है। बढ़ती अनिश्चितता तनाव पैदा कर सकती है। इसलिए अपने स्वास्थ्य, ध्यान (Meditation) और अच्छे साहित्य के अध्ययन को प्राथमिकता दें। आपकी मानसिक स्थिरता ही आपकी सबसे बड़ी ताकत होगी।”
 
हम AI से कैसे आगे रहेंगे
 
 
एक बात गौरतलब है कि AI जागरूकता (awareness) के उच्चतम स्तर को तो छू सकता है लेकिन चेतना (consciousness) के स्तर को कभी छू नही सकता और इसलिए हम हमेशा AI से एक कदम आगे रहेंगे। मानव के भीतर ईश्वरीय चेतना मौजूद है। सनातन धर्म में इसी ईश्वरीय चेतना से जुडने के लिए अनेक प्रविधियाँ बताई गई है।
 
 
यदि हम काल के चक्र की स्थिति, गति और पद्धति समझ लेते हैं तो प्रत्येक काल में विजयी हो सकते हैं। लेकिन उसके लिए जरूरी है कि हम प्रकृति के साथ कालानुकूल समन्वय बनाकर चलें। पूरी दुनिया की मानवता को इस दिशा में सोचना होगा आपसीसंघर्ष, वैमनस्य, ईर्ष्या, द्वेष, एक दूसरे के संसाधनों पर कब्जा जमाने की वृत्ति, सबको अपनी सोच और अपनी पद्धति से चलने का दुराग्रह को छोड़कर ऊंच- नीच के भाव को मिटा कर “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत” के विश्व धर्म को अपनाना होगा।
 
 
आज के दौर में ये काम संगठित सामूहिक चेतना (collective Consciousness) से जो चरित्रवान,गुणसंपन्न, अनुशासित, धर्म,समाज, राष्ट्र के लिए समर्पित व्यक्तियों के संगठन से उत्पन्न होने वाली शक्ति से होगा।
 
 
वर्ष प्रतिपदा पर ध्वज फहराया जाता है, महाराष्ट्र में इसे गुड़ी के रूप में लगाया जाता है, गुड़ी पर भी एक तांबे का पात्र चमकाकर उल्टा करके लगाया जाता है जो इस बात का संकेत करता है कि हमें अपने शरीर रूपी पात्र को शारीरिक गतिविधियों से चमकाना पड़ेगा, पूर्वाग्रहों, दुराग्रहों, शंका - कुशंकाओ से खाली करना पड़ेगा और भगवा ध्वज द्वारा दर्शित गुणों जैसे उद्यम,साहस,धैर्य,बुद्धि,शक्ति, पराक्रम आदि को दैनिक अभ्यास से विकसित कर आत्मसात करना होगा।
 
वर्ष प्रतिपदा पर फहराया जाने वाला भगवा ध्वज इस बात का संकेत भी करता है कि एक दिन सनातन विश्व धर्म की पताका पूरे दुनिया में लहराएगी और संपूर्ण मानवता का कल्याण होगा।