प्रशांत पोळ
लेखक एवं स्तंभकार
यह कल का ‘दैनिक भास्कर’ है। इस आठ कॉलम के समाचार को पढ़कर आपके मन में सबसे पहले क्या विचार आएगा? ‘हिन्दुत्व के नाम पर पश्चिम बंगाल में शानदार विजय प्राप्त करने वाली भाजपा सरकार का पहला नवरात्रि उत्सव, इस बार फीका है। और इस समय मुस्लिम कट्टरवाद की दिशा में बढ़ रहे बांग्लादेश में इस बार जबरदस्त उत्साह से नवरात्रि मनाई जा रही है’।
अगर यह विचार आपके मन में आ रहे हैं तो ‘दैनिक भास्कर’ का विमर्श सफल हो रहा है, ऐसा मानकर चलिए। झूठा विमर्श कैसे सेट किया जाता है, इसका यह प्रत्यक्ष उदाहरण है…!
क्या ‘दैनिक भास्कर’ का यह समाचार सही है?
जी नहीं। सरासर गलत है। तथ्यों को गलत पद्धति से तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है।
तो फिर वास्तविक चित्र क्या है?
वास्तविकता यह है कि अनेक दशकों के बाद, पहली बार पूरा पश्चिम बंगाल अत्यंत उत्साह से, जबरदस्त जोश के साथ दुर्गा पूजा उत्सव मना रहा है। महालय के दिन कोलकाता के ईडन गार्डन में नवरात्रि उत्सव का जो शुभारंभ हुआ, वह अद्भुत था। 3000 से अधिक ढांकिये, ढांक की थाप पर मां दुर्गा का आवाहन कर रहे थे, यह रिकॉर्ड बन गया है। इसी कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से कोलकाता के आकाश में मां दुर्गा / मां काली के दृश्य बनाए गए, वह अभूतपूर्व थे, ऐतिहासिक थे।
और एक महत्वपूर्ण बात जो ‘दैनिक भास्कर’ ने छिपाई है। इस वर्ष दुर्गा पूजा के पंडालों की संख्या पिछले वर्ष के 53,000 पंडालों की तुलना में, 28% बढ़ी है। इस वर्ष 12,400 नए पंडालों के साथ 65,000 पंडाल बने हैं, जिनमें भव्यता के साथ मां की पूजा हो रही है।
लेकिन महत्व की बात यह है कि इस बार दुर्गा पूजा समितियों ने स्वतः होकर, बांग्ला परंपरा की दुर्गा मूर्ति और सनातन आधारित पंडाल बनाने का निर्णय लिया है। यह बहुत बड़ा बदलाव हैं। पिछले वर्ष तक इन पंडालों में टीएमसी तथा मुस्लिम संगठनों का खौफ और प्रभाव होने के कारण नई शैली में, पाश्चात्य शैली में दुर्गा माता की प्रतिमाएं बन रही थीं। यह उत्सव का विकृतिकरण था। पवित्रता की भावना रौंद दी गई थी। यह सारी गंदगी इस बार दूर हो रही है, और इसीलिए पंडालों के थीम बदल रहे हैं।
एक और मुद्दा है, पंडालों को मिलने वाली सरकारी सहायता का। ममता सरकार ने हिन्दुओं को बैलेंस करने के लिए, बंदरबांट जैसे पैसे बांटे थे। इस बार भाजपा सरकार ने छोटे-बड़े पंडालों के अनुसार सहायता दी है। मुख्यमंत्री ने बड़े पंडालों से अपील की थी कि ‘चूकि आपके पास धन के अनेक स्रोत हैं, श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में चढ़ावा चढ़ा रहे हैं, अतः आप सरकारी सहायता छोड़ दीजिए’। इस अपील का असर हुआ है। अभी तक 200 से ज्यादा बड़े पंडालों ने यह सहायता छोड़ दी है।
तीन और बड़े बदलाव इस वर्ष हुए हैं –
1. इससे पहले, सरकार के समय, दुर्गा पूजा के पवित्र दिनों में भी शराब की बिक्री चलती थी। कुछ पंडालों के तो बगल में ही शराब बेची जाती थी। किंतु इस बार नहीं। इस बार महाअष्टमी के दिन पूरे पश्चिम बंगाल में शराब की बिक्री और वितरण प्रतिबंधित है।
2. इस वर्ष पूरे प्रदेश में उत्सव के समय डीजे पूर्णतः प्रतिबंधित है। ‘ढांक’ जैसे पारंपरिक वाद्य को बढ़ावा दिया जा रहा है।
3. ममता बनर्जी ने विसर्जन शोभायात्रा को ‘कार्निवल’ बना दिया था। यह उत्सव की पवित्रता के साथ भद्दा मजाक था। वर्ष 2016 से चल रहा ‘रेड रोज विसर्जन कार्निवल’ इस वर्ष नहीं होगा। इस विसर्जन शोभायात्रा को पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार नए स्वरूप में लाया जाएगा।
बंगाल अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है। उत्सव की पवित्रता को, मां दुर्गा के सम्मान को पुनः प्रस्थापित कर रहा है। सारा बंगाल अपूर्व उत्साह से यह दुर्गा पूजा, पिछले वर्षों की तुलना में अधिक भव्य, अनुशासित और धार्मिक परंपराओं के साथ मना रहा है…!
किंतु ‘दैनिक भास्कर’ को शायद यह सहन नहीं हो रहा है। इसलिए ऐसा नकारात्मक और झूठा विमर्श गढ़ने का प्रयास हो रहा हैं।